छत्तीसगढ़ में गृहमंत्री अमित शाह के लिए लगा नारा, 'देखो-देखो कौन आया, शेर आया-शेर आया'

अमित शाह जब संबोधन के लिए मंच पर आए तो वहां उपस्थित कार्यकर्ताओं ने नारा लगाया, 'देखो देखो कौन आया, शेर आया शेर आया.' 

छत्तीसगढ़ में गृहमंत्री अमित शाह के लिए लगा नारा, 'देखो-देखो कौन आया, शेर आया-शेर आया'
गृहमंत्री अमित शाह.

रायपुर: केंद्रीय गृ​हमंत्री अमित शाह (Home Minister Amit Shah) ने अपने छत्तीसगढ़ के दौरे पर बीजेपी प्रदेश कार्यालय में पार्टी कार्यकर्ताओं और अलग-अलग समाज के प्रमुखों को संबोधित किया. अमित शाह जब संबोधन के लिए मंच पर आए तो वहां उपस्थित कार्यकर्ताओं ने नारा लगाया, 'देखो देखो कौन आया, शेर आया शेर आया.'

आपको बता दें कि 'देखो देखो कौन आया, शेर आया शेर आया' रणवीर सिंह की फिल्म 'गली ब्वॉय' (Gully Boy) में अभिनेता सिद्धांत चतुर्वेदी पर फिल्माया गया एक रैप सॉन्ग है. इस फिल्म में सिद्धांत चतुर्वेदी का नाम एमसी शेर होता है. 

केवल बीजेपी ही विचारधारा वाली पार्टी
अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा,'मैं अब राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं हूं फिर भी यहां के कार्यकर्ताओं ने मुझसे मिलने की जो इच्छा वो मुझे यहां खींच लाया. मैं बहुत छोटी उम्र से बीजेपी से जुड़ा हूं. बीजेपी अकेली ऐसी पार्टी है जो विचारधारा वाली पार्टी है.' अमित शाह के साथ पूर्व सीएम रमन सिंह, केंद्रीय मंत्री रेणुका सिंह, विक्रम उसेंडी, धरमलाल कौशिक, सरोज पांडे, सौदान सिंह और रामविचार नेताम मौजूद थे. 

अमित शाह ने दी कार्यकर्ताओं को सीख
उन्होंने आगे कहा, 'कभी-कभी छत्तीसगढ़ के कार्यकर्ता आते हैं और निराशा व्यक्त करते हैं कि सरकार चली गई, लेकिन ऐसे कम ही कार्यकर्ता होंगे. बीजेपी का कार्यकर्ता तभी ज्यादा जोशो-खरोश में होता है जब विपक्ष में होता है. शायद मैं भी रहता तो दुखी होता, लेकिन अब आगे की लड़ाई लड़नी है.'

अमित शाह ने कहा, 'जय-पराजय दोनों जीवन के हिस्सा हैं. जीत पर राजीव गांधी की तरह अहंकारी नहीं होना है. हारने पर निराश नहीं होना है. यह अटल और अडवाणी जी की पार्टी है. लोकसभा चुनाव में हमने छह महीने में जनाधार बदल दिया. छत्तीसगढ़ बीजेपी का गढ़ है. हमें जनता ने सकारात्मक विपक्ष के नाते काम करने का दायित्व दिया है. हम यहां के आदिवासी और पिछड़ों के लिए काम करें.'

उन्होंने कहा, 'हमें जनता के बीच जाकर सरकार की नाकामियां बतानी होंगी. मोदी सरकार और पिछली बीजेपी सरकार के कामकाज को बताना होगा. तभी फिर से सफलता मिलेगी. चुनाव का जय-पराजय बीजेपी का भाग्य नहीं तय कर सकता. कार्यकर्ताओं की मेहनत और निष्ठा तय करता है. कार्यकर्ता इस पराजय से हताश न हों, वर्तमान सरकार अपने वादे पूरे करने में नाकाम रही है.'