छत्तीसगढ़ः नतीजों से पहले बदले जोगी के सुर? बीजेपी को समर्थन देने पर कही ये बात

अजीत जोगी ने 17 नवम्बर को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर 8 धार्मिक ग्रंथों की कसम खाते हुए कहा था कि वो सूली पर लटककर मरना पसंद करेंगे लेकिन बीजेपी को समर्थन नहीं देंगे.

छत्तीसगढ़ः नतीजों से पहले बदले जोगी के सुर? बीजेपी को समर्थन देने पर कही ये बात
फाइल फोटो

सत्यप्रकाश, रायपुरः छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनावों के वोटिंग हो चुकी है अब सभी नेताओं को 11 दिसंबर का इंतजार है जब जनता का फैसला सबके सामने आएगा. राज्य में इस बार सत्ताधारी बीजेपी और कांग्रेस के अलावा पूर्व सीएम अजीत जोगी की पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ ने बीएसपी के साथ गठबंधन का चुनाव लड़ा है. मतदान से पहले अजीत जोगी ने साफ कर दिया था कि वह राज्य में बीजेपी को किसी तरह से समर्थन नहीं देंगे. लेकिन अब जोगी के सुर बदल गए हैं. 8 ग्रंथों की कसम खाकर बीजेपी को समर्थन नहीं देने का बयान देने वाले जोगी अब कह रहें कि रिजल्ट के बाद फैसला लेंगे.

अजीत जोगी ने 17 नवम्बर को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर 8 धार्मिक ग्रंथों की कसम खाते हुए कहा था कि वो सूली पर लटककर मरना पसंद करेंगे लेकिन बीजेपी को समर्थन नहीं देंगे. गौरतलब है कि 20 नवंबर को छत्तीसगढ़ में 72 सीटों पर दूसरे चरण का मतदान हुआ था. आपको बताते हैं कि जी मीडिया से बातचीत में अजीत जोगी ने क्या कहा.

सवालः सीएम का एक बयान चर्चा में है कि अगर बहुमत कम आये तो आपसे भी समर्थन कि बात हो सकती है?

जवाब- नदी के किनारे पहुंचे तब तय करो, उसे कैसे तय करना है....पहले किनारे तक तो पहुंचो, फिर तय करना कैसे पार करना है.

सवाल- क्या ऐसे समीकरण बनते है तो समर्थन का सोचेंगे?

जवाब- सूत न कपास, जुलाहों में लठ्ठम-लठ्ठा....अभी रिजल्ट तो पहले आ जाये....शायद ऐसी स्थिति ही नहीं रहे....

सवाल- तो क्या नतीजे आने के बाद इसपर निर्णय लेंगे....

जवाब- हां..

वहीं अब इस मामले में कांग्रेस जोगी पर हमलावर हो गई है.  छत्तीसगढ़ कांग्रेस के महामंत्री शैलेष नितिन त्रिवेदी ने अजीत जोगी को फिर से बीजेपी की सहयोगी और बी टीम का मुखिया करार दिया है और कहा है कि इस बयान से सांठ-गांठ साफ उजागर हो रहा है.

वहीं इस मसले पर बीजेपी का बयान बड़ा दिलचस्प आया है. बीजेपी प्रदेश उपाध्यक्ष सुनील सोनी ने कहा है कि उन्हें अजीत जोगी के बयान से कोई आपत्ति नहीं है....लेकिन बीजेपी सरकार पूर्ण बहुमत से बना रही है. दरअसल अजीत जोगी अपने फैसले और बयान राजनीतिक नफा-नुकसान का आंकलन कर पहले भी बदलते रहे हैं. ऐसे में अजीत जोगी के इस बयान ने सियासी हल्के में नई बहस फिर से छेड़ दी है कि क्या जोगी फिर से पलट जाएंगे?