भूपेश बघेल: जिनका विवादों से रहा है नाता और चुनावी अखाड़े में भतीजा देता रहा टक्‍कर

आइये डालते हैं भूपेश बघेल के राजनीति जीवन और उनसे जुड़ी प्रमुख बातों पर एक नजर...

भूपेश बघेल: जिनका विवादों से रहा है नाता और चुनावी अखाड़े में भतीजा देता रहा टक्‍कर
(फाइल फोटो)

छत्‍तीसगढ़ विधानसभा चुनाव (Chhattisgarh Elections 2018) को लेकर राज्‍यभर में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं और राज्‍य के साथ-साथ देशभर के लोगों की नजरें प्रदेश के कद्दावर नेताओं की चुनाव में हार-जीत को लेकर टिकी हुई हैं. इन्‍हीं में से एक सीट है पाटन, जहां से मैदान में उतरे हैं प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रमुख भूपेश बघेल. राज्‍य में राजनीति के केंद्र बिंदुओं में से एक पाटन विधानसभा क्षेत्र में इस बार उनके सामने भाजपा ने मोती लाल साहू के रूप में एक नए चेहरे को चुनावी अखाड़े में उतारा है. अपने तेवरों से छत्तीसगढ़ की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान बनाने वाले राजनेताओं में शुमार बघेल का नाता विवादों से भी कम नहीं रहा है. सीडी कांड की वजह से भूपेश बघेल सुर्खियों में रहे हैं. इसके चलते उन्हें जेल जाना पड़ा, लेकिन उन्होंने जमानत लेने से इनकार कर दिया था. इस बार भी बघेल अपनी पार्टी के राज्‍य में बेहतर प्रदर्शन की उम्‍मीद में हैं.

आइये डालते हैं उनके राजनीति जीवन और उनसे जुड़ी प्रमुख बातों पर एक नजर...
23 अगस्त 1961 को जन्मे बघेल कुर्मी जाति से आते हैं. बात 1980 के दशक की है, जब छत्तीसगढ़ मध्यप्रदेश का हिस्सा हुआ करता था. उस वक्‍त भूपेश बघेल ने पॉलिटिक्‍स में अपनी पारी की शुरुआत यूथ कांग्रेस के साथ की. दुर्ग जिले के रहने वाले भूपेश यहां के यूथ कांग्रेस अध्यक्ष बने. वे 1990 से 94 तक जिला युवक कांग्रेस कमेटी, दुर्ग (ग्रामीण) के अध्यक्ष रहे. भूपेश बघेल वह छत्तीसगढ़ मनवा कुर्मी समाज के 1996 से वर्तमान तक संरक्षक बने हुए हैं. मध्यप्रदेश हाउसिंग बोर्ड के 1993 से 2001 तक निदेशक भी रहे हैं. 

2000 में जब छत्तीसगढ़ अलग राज्य बना तो वह पाटन सीट से विधानसभा पहुंचे. इस दौरान वह कैबिनेट मंत्री भी बने. 2003 में कांग्रेस के सत्ता से बाहर होने पर भूपेश को विपक्ष का उपनेता बनाया गया. अक्तूबर 2014 में उन्हें छत्तीसगढ़ कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया और वे तब से इस पद पर हैं.

दरअसल, स्वतंत्रता सेनानियों के इस इलाके में शुरू से ही राजनीतिक चेतना रही है और इसका असर चुनाव में भी देखने को मिलता रहा है. यही वजह है कि यहां के मतदाताओं ने हमेशा अपने विवेक से मतदान किया और परिणाम में हरबार उलट फेर होते रहे हैं. अगर इस क्षेत्र की खासियत के बारे में बात की जाए तो वह यह है कि यहां जब भी यहां त्रिकोणीय मुकाबले हुए है तब-तब कांग्रेस में फायदे में रही है. जबकि सीधे मुकाबले में कांग्रेस के विरोधियों ने जीत दर्ज की है. पिछले तीन चुनाव से चाचा-भतीजे भूपेश बघेल व विजय बघेल के बीच यहां मुकाबला हुआ है.

2003 में कांग्रेस के भूपेश बघेल को 44217 वोट मिले थे, जबकि उनके भतीजे और एनसीपी के विजय बघेल को 37308 वोट मिले थे. वहीं, 2008 के चुनाव में भूपेश बघेल को 51158 वोट मिले थे, वहीं उनके प्रतिद्वंद्वी बीजेपी के विजय बघेल को 59000 वोट मिले थे. 2013 के नतीजों में भूपेश बघेल को 68185 वोट मिले थे तो बीजेपी के विजय बघेल को 58442 वोट मिले थे.

भूपेश बघेल का विवादों से भी काफी नाता रहा है. साल 2017 के अक्‍टूबर में वायरल हुए एक कथित सेक्स टेप में दिल्ली से एक पत्रकार की गिरफ्तारी हुई थी. इस मामले में भाजपा ने कांग्रेस नेताओं पर कथित सेक्स सीडी बांटने का आरोप लगाया था. इस सीडी कांड में पत्रकार के साथ ही भूपेश बघेल के खिलाफ रायपुर में एफआईआर दर्ज हुई थी. बाद में राज्य सरकार की तरफ से यह मामला सीबीआई को सौंप दिया था और जांच एजेंसी द्वारा बीजेपी और कांग्रेस नेताओं से पूछताछ की गई थी.

बाद में इस मामले में छत्तीसगढ़ भूपेश बघेल 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था. उन्‍हें अलग-अलग धाराओं के तहत आरोपी बनाया गया था. बाद में बताते हैं कि बघेल की भूमिका से पार्टी आलाकमान काफी नाराज हुए और उन्‍होंने पूर्व केन्द्रीय मंत्री डा.चरणदास महंत को चुनाव अभियान समिति का प्रमुख बनाकर उनके समकक्ष खड़ा कर दिया था.

अक्टूबर में ही भूपेश बघेल नए विवाद में पड़ गए थे. उन्‍होंने एक सभा में बीजेपी पर निशाना साधते हुए लड़कियों के लिए आपत्तिजनक शब्द कह डाले थे, जिससे नाराज होकर वहां मौजूद महिलाएं बीच कार्यक्रम में ही उठकर चली गईं थीं.