एक्सप्रेस-वे निर्माण में गड़बड़ी: इंजीनियर्स और अधिकारियों की मिलीभगत का महाघोटाला

राजधानी के स्टेशन से शदाणी दरबार तक बनाए जा रहे 12 किमी के एक्सप्रेस-वे के निर्माण में हुई गड़बड़ियों में कई इंजीनियर्स की लापरवाही का मामले सामने आया है. इस मामले में 6 इंजीनियर्स को सस्पेंड कर दिया गया है.

एक्सप्रेस-वे निर्माण में गड़बड़ी: इंजीनियर्स और अधिकारियों की मिलीभगत का महाघोटाला
प्रतिकात्मक फोटो

रायपुर: राजधानी के स्टेशन से शदाणी दरबार तक बनाए जा रहे 12 किमी के एक्सप्रेस-वे के निर्माण में हुई गड़बड़ियों में कई इंजीनियर्स की लापरवाही का मामले सामने आया है. इस मामले में 6 इंजीनियर्स को सस्पेंड कर दिया गया है. जांच एजेंसियों ने इनकी लापरवाही का खुलासा किया था. 

खराब निर्माण सामग्री के इस्तेमाल की वजह से एक्सप्रेस-वे में कई जगह सड़क धंस गई. जबकि एक्सप्रेस वे, पांचों फ्लाईओवर की डोलती रीटेनिंग वॉल सरकारी लापरवाही का नतीजा था. कंसल्टेंट कंपनी को शासन ने 1.18 करोड़ रुपए की वसूली का नोटिस दिया है. निलंबित इंजीनियरों में सड़क विकास निगम के तत्कालीन डिप्टी जीएम सतीश जाधव, प्रोजेक्ट मैनेजर एससी आर्य, डिप्टी मैनेजर निशेष भट्ट और जतिंद्र सिंह, असिस्टेंट मैनेजर फेरहाज़ फारुखी और विवेक सिन्हा के नाम हैं.  

इस 345 करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्ट में हुई गड़बड़ियां साबित हो गई हैं. इसे छोटी रेलवे लाइन (नैरोगेज) की जमीन पर बनाया गया है. सड़क बनाने का जिम्मा छत्तीसगढ़ सड़क विकास निगम (सीआरडीसी) के अधीन गुजरात की कंपनी आयरन ट्राइएंगल को दिया गया था. जबकि देखरेख मध्य प्रदेश की लायन इंजीनियरिंग कंसल्टेंट कंपनी को नियुक्त किया गया था. इस एक्सप्रेस-वे का निर्णा रमन सरकार के शासन काल में हुआ था. भूपेश सरकार के आने के बाद उद्घाटन हुए बिना इस सड़क पर थोड़ा ट्रैफिक भी चलने लगा. जुलाई-अगस्त कई जगह सड़क धंस गई है.

जांच में घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल के सबूत मिलने के बाद सरकार ने सीआरडीसी के महाप्रबंधक जीएस सोलंकी को हटा दिया. इतना ही नहीं IFS अनिल राय को भी सीआरडीसी के एमडी और पीडब्लूडी सचिव पद से हटाने की कार्रवाई आनन-फानन की गई. अब IAS सिद्धार्थ कोमल परदेसी को यह जिम्मेदारी दी गई. 

एक्सप्रेस-वे में निर्माण में धांधली का मुद्दा जोगी कांग्रेस के विधायक धर्मजीत सिंह उठाया था. निर्माण का जिम्मा प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ सिंचाई अफसरों पर था. इसके बाद सरकार ने जांच कमेटी बना दी. कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे किए. इस रिपोर्ट के मुताबिक एक्सप्रेस-वे के फाफाडीह, देवेंद्र नगर, पंडरी, शंकरनगर, तेलीबांधा फ्लाईओवर पर बनी साढ़े 3 किमी तक बनी सड़क इतनी खराब है कि इसे उखाड़कर दोबारा बनाना पड़ेगा. रिपोर्ट में सड़कों के धंसने से और फ्लाईओवर की रीटेनिंग वॉल के बैंड होने की पुष्टि की गई है.