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छत्तीसगढ़: 10 साल से सामाजिक बहिष्कार की पीड़ा झेल रहा है ये परिवार

हम भले ही विकास की कितनी बातें कर लें, लेकिन हमारा समाज आज भी परंपरा, जाति, रीति-रिवाज की बेड़ियों में जकड़ा हुआ है.

छत्तीसगढ़: 10 साल से सामाजिक बहिष्कार की पीड़ा झेल रहा है ये परिवार
प्रभावती ने आरोप लगाए कि समाज में जोड़ने के लिए 5 हजार रूपए और जमीन देने की मांग की गई है.

नई दिल्ली/कोरिया: हम भले ही विकास की कितनी बातें कर लें, लेकिन हमारा समाज आज भी परंपरा, जाति, रीति-रिवाज की बेड़ियों में जकड़ा हुआ है. इन रूढ़िवादी परंपराओं को अगर आज भी कोई बदलने की कोशिश करे, तो समाज उसके विरोध में उठ खड़ा होता है. छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में एक महिला बीते 10 साल से सामाजिक बहिष्कार का दंश झेल रही है. महिला की गलती केवल इतनी थी कि उसे बेटा नहीं था, इस कारण उसने अपने पति का अंतिम संस्कार कर दिया था. समाज के लोगों ने 10 साल बाद भी महिला के परिवार का बहिष्कार आज भी जारी रखा हुआ है. साथ ही आए दिन परिवार के कार्यक्रमों में अड़ंगा भी लगाता रहता है.     

बेटा न होने पर किया था अंतिम संस्कार
दरअसल, कोरिया जिले के बैकुंठपुर के सागरपुर में रहने वाला एक परिवार बीते 10 साल से सामाजिक बहिष्कार की पीड़ा झेल रहा है. पीड़ित परिवार की प्रभावती ने बताया कि साल 2008 में उनके पिता रामलेखावन साहू का निधन होने पर पिता का अंतिम संस्कार मां जयमनिया बाई ने ही कर दिया था. उन्होंने बताया कि मां ने यह निर्णय बेटा न होने के कारण लिया था. प्रभावती ने बताया कि पिता के अंतिम संस्कार के दसवें दिन दशगात्र व चंदनपान सहित अन्य कार्यक्रम होने थे. गांव के सभी लोगों को बुलाया गया, लेकिन कोई नहीं आया. वहीं गांव के साहू समाज ने परंपरा का हवाला देकर तानाशाही रवैया अपनाते हुए परिवार का बहिष्कार कर दिया. 

समाज में जोड़ने के लिए मांग रहे है जमीन 
पीड़िता प्रभावती ने बताया कि बीती 27 मई, 2018 उनकी मां जयमनिया बाई की मौत हो गई. अंतिम संस्कार के दसवें दिन परिवार ने दशगात्र व चंदनपान सहित अन्य कार्यक्रम की व्यवस्था की. लेकिन समाज के लोगों ने बहिष्कार की बात करते हुए कार्यक्रम में शामिल होने से मना कर दिया. प्रभावती ने आरोप लगाते हुए कहा कि समाज ने परिवार को फिर से समाज में जोड़ने के लिए 5 हजार रूपए और जमीन देने की मांग की है. उन्होंने बताया कि मां के अंतिम संस्कार के समय भी गांव के साहू समाज ने दाह संस्कार में रुकावट डालने की कोशिश की थी. उन्होंने बताया कि समाज के बहिष्कार के कारण परिवार में किसी की भी शादी आदि जैसे कार्यक्रम भी नहीं हो पा रहे हैं. 

परिवार के साथ गलत हुआ है- समाज
पीड़िता के परिवार ने इस बहिष्कार से तंग आकर पुलिस-प्रशासन और समाज के पदाधिकारियों को लेटर लिखकर इस पीड़ा से छुटकारा दिलाने की मांग की है. स्थानीय थाना प्रभारी रविन्द्र अनंत ने कहा है कि मामला में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी और दोषियों को छोड़ा नहीं जाएगा. वहीं साहू समाज के कुछ लोगों ने इस मामले पर कहा है कि परिवार के साथ जो कुछ भी वह गलत है. बड़े बुजुर्ग व समाज के सदस्यों को बैठक में चर्चा कर समस्या सुलझा लेनी चाहिए.