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बस्तर में 24,000 से ज्यादा बच्चे हैं कुपोषित, सरकारी योजनाओं की खुली पोल

छत्तीसगढ़ के बस्तर में नौनिहालों में कुपोषण एक बड़ी समस्या है . आपको जानकर हैरानी होगी कि बस्तर जिले में 45 प्रतिशत बच्चे कुपोषित हैं. जिले के 70 हजार में से 24 हजार बच्चे कुपोषित और 7 हजार बच्चे गंभीर कुपोषित हैं.

बस्तर में 24,000 से ज्यादा बच्चे हैं कुपोषित, सरकारी योजनाओं की खुली पोल

बस्तरः छत्तीसगढ़ के बस्तर में नौनिहालों में कुपोषण एक बड़ी समस्या है. आपको जानकर हैरानी होगी कि बस्तर जिले में 45 प्रतिशत बच्चे कुपोषित हैं. जिले के 70 हजार में से 24 हजार बच्चे कुपोषित और 7 हजार बच्चे गंभीर कुपोषित हैं. राज्य में कुपोषण से लड़ने के लिए 14 से अधिक योजनाएं संचालित हैं, लेकिन आंकड़ों पर गौर करें तो स्तिथियां बेहद गंभीर हैं. दरअसल, बस्तर में बच्चों को उचित न्यूट्रीशियन युक्त भोजन न मिल पाने की वजह से उनमे कुपोषण व्याप्त है. कुछ महीने पूर्व राज्य सरकार की सुपोषण योजना की बस्तर मे मुख्यमंत्री ने शूरुआत की, जिसके तहत आंगनबाडी केन्द्रों मे कुपोषित बच्चों के लिए तीन दिन अंडा और तीन दिन मूंगफल्ली-गुड़ के लड्डू दिए जाने थे.

इसके साथ ही जिले के चार सुपोषण केन्द्रों मे इन बच्चों के इलाज के लिए बेहतर सुविधा के साथ इनके खानपान का खास ख्याल रखा जाना है. इसके तहत अमला कोशिशों में लगा हुआ है, पर इससे कोई व्यापक बदलाव भी आता नहीं दिख रहा है. जिस संख्या में बच्चे कुपोषित हैं , उतनी तीव्रता से इसके खिलाफ काम होता नहीं दिख रहा है. नगरों के पास के बच्चे और उनकी माताएं सेंटरों में लाई जा रही हैं पर अंदरूनी इलाकों में प्रशासन की पहुंच कम ही है. 

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बस्तर संभाग का बड़ा इलाका बीहड़ों में है, वहां पहुचना प्रशासन के लिए टेढ़ी खीर है . अंदरूनी इलाकों में मोनिटरिंग की भी खानापूर्ति भर होती है. अधिकारी ये तो मानते हैं कि आंकड़े खतरनाक हैं, पर वे अपने प्रयासों को संतुष्टिदायक भी बताते हैं.  जिला महिला बाल विकास अधिकारी ने बताया कि अभी बस्तर जिले के 82 आंगनबाड़ी केन्द्रों को चयनित किया गया है जहां बच्चों में कुपोषण का प्रतिशत 45 से अधिक है. प्रथम चरण में इस योजना से लगभग 1800 बच्चे लाभान्वित होंगे. वहीं दूसरा चरण भी जल्द ही प्रारम्भ किया जायेगा. 

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अगर केवल बस्तर जिले के आंकड़ों पर नजर डाला जाए तो लगभग 70 हजार बच्चों में 24 हजार बच्चे कुपोषित और 7 हजार बच्चे गंभीर कुपोषित हैं.  ये वह आंकड़े हैं जो जिला प्रशासन ने उपलब्ध करवाए हैं. वहीं उन्होंने बताया कि कुपोषण से लड़ने के लिए प्रसाशन द्वारा 14 से अधिक योजनाएं संचालित की जा रही हैं. वहीं राज्य सरकार की  सुपोषण योजना के तहत भी बच्चों को सुपोषण केन्द्र में पोषण आहार दिया जा रहा है.