छत्तीसगढ़: आदिवासियों की भूमि बेचने के बदले नियम, 21 नए स्टूडेंट हॉस्टल को मिली मंजूरी

छत्तीसगढ़ राज्य जनजाति सलाहकार परिषद की बैठक में तय हुआ कि अचानकमार टाईगर रिजर्व में तीन गांवों तिलईडबरी, बिरारपानी, छिरहट्टा का विस्थापन होगा. प्रत्येक विस्थापित परिवार को 10 लाख रुपए या दो हेक्टेयर भूमि और 5000 वर्गफीट की बाड़ी, साथ ही पेयजल और सड़क की सुविधाएं मुआवजे के रूप में जाएंगी.

छत्तीसगढ़: आदिवासियों की भूमि बेचने के बदले नियम, 21 नए स्टूडेंट हॉस्टल को मिली मंजूरी
फाइल फोटो.

रायपुर: जिस दिन पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर देश की परिसंपत्तियों को बेचकर आर्थिक नुकसान की भरपाई करने का आरोप लगाया और LIC में हिस्सेदारी बेचने को 'शर्मनाक' घटना बताया था ठीक उसी दिन छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार ऐसा ही कुछ कारनामा कर दिया. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तिलईडबरी, बिरारपानी, छिरहट्टा जिले में 21 नए छात्रावास बनाने के लिए संरक्षित आदिवासी जमीन बेचने का फैसला किया.

बता दें कि छत्तीसगढ़ राज्य जनजाति सलाहकार परिषद की बैठक सोमवार को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए संपन्न हुई. इस बैठक में जाति प्रमाण-पत्र जारी करने, निरस्त करने की प्रक्रिया की समीक्षा की गई. बैठक में तय हुआ कि अचानकमार टाईगर रिजर्व में तीन गांवों तिलईडबरी, बिरारपानी, छिरहट्टा का विस्थापन होगा. प्रत्येक विस्थापित परिवार को 10 लाख रुपए या दो हेक्टेयर भूमि और 5000 वर्गफीट की बाड़ी, साथ ही पेयजल और सड़क की सुविधाएं मुआवजे के रूप में जाएंगी.

शैक्षणिक सत्र 2020-21 से 21 नए हॉस्टल, 14750 सीटों को स्वीकृति
बैठक में इस इलाके के 19 गांवों के विस्थापन के लिए सहमति बनी है. बैठक में बताया गया कि जिला मुख्यालयों के हॉस्टल में सीट से अधिक संख्या में आवेदन आते हैं. शैक्षणिक सत्र 2020-21 से 21 नए छात्रावासों में 14 हजार 750 सीट की स्वीकृति दी गई है. आदिवासी समुदाय के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार की दिशा में काम करने पर जोर दिया गया. बैठक में बताया गया कि अब कुपोषित बच्चों की संख्या में 13 प्रतिशत की कमी आई है.

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गांवों में  राजस्व संबंधी दिक्कतों के​ निपटारे के लिए चलेगा विशेष अभियान
छत्तीसगढ़ राज्य जनजाति सलाहकार परिषद् की बैठक में वन अधिकार अधिनियम पर चर्चा हुई. सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि वन क्षेत्रों में सर्वेक्षण कर राजस्व के दस्तावेज दुरूस्त कर लिए जाएं. गांवों में राजस्व संबंधी दिक्कतों के निराकरण विशेष अभियान चलाया जाए. इसके तहत गांवों में शिविरों का आयोजन होगा. उन्होंने कहा कि वन अधिकार मान्यता पत्र में व्यक्तिगत पट्टे और सामुदायिक पट्टे भी दिए जा रहे हैं. गांव के स्तर पर जनप्रतिनिधि पात्र व्यक्तियों के आवेदन लेंगे, इसे ग्राम सभा से पारित कर उन्हें वन भूमि का पट्टा देंगे.

आदिवासियों की जमीन गैर आदिवासियों को बेचने के नियमों में होगा बदलाव
भू-राजस्व के नियमों के मुताबिक आदिवासियों की भूमि के संबंध में नियमों के संशोधन करने के लिए उप समिति का गठन किया गया है. इसमें विधायक मोहन मरकाम, चिंतामणी महराज, इन्द्रशाह मण्डावी, लक्ष्मी ध्रुव, लालजीत राठिया और शिशुपाल सिंह सोरी शामिल होंगे. यह कमेटी आदिवासियों की जमीन गैर आदिवासियों को बेचने के बारे में नियमों का परीक्षण कर इन नियमों में संशोधन के लिए प्रस्ताव पेश करेगी.

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