close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

छत्तीसगढ़ में गहराया महाधिवक्ता नियुक्ति का विवाद, कनक तिवारी ने की राज्यपाल मुलाकात

 पूर्व महाधिवक्ता कनक तिवारी ने अपने स्थान पर दूसरी नियुक्ति को गैर संवैधानिक करार दिया है. वहीं अपनी नियुक्ति के बाद से ही अपने साथ बड़ी साजिश होना भी बताया. कनक तिवारी ने यह भी साफ किया है कि उन्होंने ना ही कोई इस्तीफा दिया है, ना ही काम करने की अनिक्षा जाहिर की थी. 

छत्तीसगढ़ में गहराया महाधिवक्ता नियुक्ति का विवाद, कनक तिवारी ने की राज्यपाल मुलाकात
तिवारी ने यह भी स्पष्ट किया है कि उनका मुख्यमंत्री और अन्य किसी मंत्री से कोई मतभेद नहीं है (फोटो साभारः facebook)

रायपुरः राज्य की न्याय व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालन करने प्रदेश की सरकार महाधिवक्ता की नियुक्ति करती है. सूबे में कोंग्रेस की भूपेश बघेल सरकार ने महाधिवक्ता के पद पर दुर्ग के वरिष्ठ अधिवक्ता कनक तिवारी की नियुक्ति की थी, लेकिन नियुक्ति के कुछ माह बाद ही महाधिवक्ता के पद को लेकर विवाद शुरू हो गया है. सरकार ने कनक तिवारी को महाधिवक्ता के पद से हटा हटा दिया है. दरअसल, बड़े ही नाटकीय अंदाज में महाधिवक्ता कनक तिवारी के स्थान पर सतीश चंद्र वर्मा की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा कर दी गई.

सतीश वर्मा की नियुक्ति के बाद से ही लगातार विवाद गहराता जा रहा है. पूर्व महाधिवक्ता कनक तिवारी ने अपने स्थान पर दूसरी नियुक्ति को गैर संवैधानिक करार दिया है. वहीं अपनी नियुक्ति के बाद से ही अपने साथ बड़ी साजिश होना भी बताया. कनक तिवारी ने यह भी साफ किया है कि उन्होंने ना ही कोई इस्तीफा दिया है, ना ही काम करने की अनिक्षा जाहिर की थी. वे लगातार काम कर रहे थे. इस पूरे मामले पर कनक तिवारी ने खुलासा करते हुए कहा कि राज्यशासन के महाधिवक्ता होने के नाते उन्होंने शासन को कई अहम सुझाव दिए थे, जिन पर अमल नही किया गया.

देखें लाइव टीवी

मध्य प्रदेशः सिंगरौली में भिक्षावृत्ति बना अपराध, भीख मांगी तो होगी कानूनी कार्रवाई

तिवारी ने राज्य शासन के द्वारा कई मामलों में जांच के लिए SIT गठन पर भी अपनी असहमति दी थी. कनक तिवारी ने आरोप भी लगाया है कि उनके नियक्ति को 5 माह हो गए, लेकिन विधि सचिव को लगातार बुलाने पर भी उन्होंने एक बार भी महाधिवक्ता से मिलना उचित नहीं समझा. मुख्यमंत्री से भी कई विषयों पर गोपनीय चर्चा कर सुझाव देने का प्रयास किया लेकिन, मुख्यमंत्री ने भी समय नहीं दिया.

गर्लफ्रेंड के कहने पर नाबालिग ने चुराई कार, पकड़े जाने पर किया चौंकाने वाला खुलासा

चर्चा के लिए CM भूपेश बघेल को भी किया था कॉल
कनक तिवारी ने मुख्यमंत्री से चर्चा के लिए व्हाट्सएप्प के जरिये अपने साथ हो रही साजिश की जानकारी भी समय समय पर दी थी, लेकिन उनको लगातार अनदेखा किया गया. कनक तिवारी ने एडवोकेट नियमावली का हवाला देते हुए बताया कि महाधिवक्ता की नियुक्ति और हटाये जाना राज्यपाल का विशेषाधिकार होता है, जिसमे राज्य शासन का मनचाहा अधिवक्ता ही इस पद पर बैठाया जाता है. अपने आप को हटाए जाने को कनक तिवारी ने देश का पहला मामला बताते हुए कहा कि बिना पद रिक्त हुए दूसरे को उस पद पर बदला गया.

मध्यप्रदेश में अब से OBC को मिलेगा 27 प्रतिशत आरक्षण, कैबिनेट ने दी मंजूरी

अधिसूचना में साफ साफ लिखा हुआ है कनक तिवारी महाधिवक्ता के स्थान पर सतीश चंद वर्मा अतरिक्त महाधिवक्ता को महाधिवक्ता नियुक्त करते हैं. तिवारी ने उनसे पूर्व के महाधिवक्ता का जिक्र करते हुए बताया कि पहले उस पद को रिक्त होना था. बाद में उस रिक्त पद पर नियुक्ति होती, लेकिन किसी के स्थान पर रिप्लेस का तरीका नियम विरुद्ध है. वहीं कनक तिवारी ने महाधिवक्ता पद से हटाने में बड़ी साजिश हुई जिसमें मेरे विरोधियों का हाथ है.

बुंदेलखंड में फिर सूखे की मार से परेशान हुए लोग, पलायन करने को हुए मजबूर

अपने पद से हटाए जाने के बाद तिवारी ने विपक्षी राजनीतिक दलों के द्वारा मामले को उठाये जाने पर भी स्पष्ट किया कि उन्हें किसी से कोई मतलब नही वे संवैधानिक पद पर थे और किसी भी तरह के राजनीतिक विवाद में नही पड़ना चाहते. तिवारी ने यह भी स्पष्ट किया है कि उनका मुख्यमंत्री और अन्य किसी मंत्री से कोई मतभेद नहीं है ना ही वे कोई विवाद चाहते है. तिवारी ने पद से हटाए जाने के बाद राज्यपाल से मुलाकात कर हटाये जाने के तरीके को नियम विरुद्ध बताये हुए उनके जवाब का इंतजार करना बताया है.