छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज मुद्दे पर हुई सुनवाई, छात्रों को मिली बड़ी राहत

सरकार के पक्ष के बाद अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने NMC (नेशनल मेडिकल कमीशन)  से 23 सितंबर तक जवाब मांगा है.

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज मुद्दे पर हुई सुनवाई, छात्रों को मिली बड़ी राहत
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (फाइल फोटो)

बिलासपुरः छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में बने चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को सरकार ने राहत दी है. हाईकोर्ट में शनिवार को सरकार की तरफ से बताया गया है कि विद्यार्थियों के भविष्य को देखते हुए उन्हें दूसरे सरकारी मेडिकल कॉलेजों में शिफ्ट करने का निर्णय लिया गया है. इसके लिए उन्होंने NMC (नेशनल मेडिकल कमीशन) को पत्र लिखा है. जबकि दूसरे मेडिकल कॉलेजों में सीट बढ़ाए जाने की भी मांग की है. 

NMC से 23 सितंबर तक मांगा जवाब 
सरकार के पक्ष के बाद अब बिलासपुर हाईकोर्ट ने NMC (नेशनल मेडिकल कमीशन)  से 23 सितंबर तक जवाब मांगा है. दरअसल, चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज की मान्यता 2018 में ही रद्द हो चुकी है.  MCI (मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया) की टीम को निरीक्षण के दौरान मेडिकल कॉलेज के लिए जरूरी बुनियादी मापदंडों में बहुत कमियां मिली थीं. इसके चलते कॉलेज के 2017 बैच में दाखिला लिए हुए विद्यार्थियों के सामने भविष्य पर संकट खड़ा हो गया.  इस पर छात्र-छात्राओं ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. 

2 साल तक चली सुनवाई 
छात्रों द्वारा दायर की याचिका पर हाईकोर्ट में दो साल तक सुनवाई चली. करीब 2 साल चली लंबी सुनवाई के बाद सरकार ने कोर्ट को बताया था कि वह स्टूडेंट्स के भविष्य को ध्यान में रखते हुए कॉलेज का अधिग्रहण करने को तैयार है. राज्य सरकार ने चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज के अधिग्रहण की प्रक्रिया आज से 14 दिन पहले पूरी कर ली है. विधानसभा के मानसून सत्र में पारित अधिग्रहण अधिनियम को शुक्रवार को राजपत्र में प्रकाशित कर दिया गया. इसके बाद प्राइवेट मेडिकल कॉलेज अब पूरी तरह से सरकारी मेडिकल कॉलेज हो गया. छत्तीसगढ़ में ऐसा पहली बार हुआ है जब सरकार ने किसी निजी शिक्षा संस्थान का अधिग्रहण किया हो. 

2016-17 में हुए थे आखिरी बार एडमिशन 
दरअसल, चंदूलाल कॉलेज में पढ़ाई करने वाला आखिरी बैच 2016-17 का है. लेकिन साल 2018 में चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द हो गई थी. जिसके चलते इस बैच में शामिल छात्रों की पढ़ाई बीच में ही अटक गई है. अभी तक यहां पर मेडिकल कॉलेज के लिए जरूरी इंफ्रा स्ट्रक्चर का निर्माण नहीं हो सका है. विद्यार्थियों के लिए ना तो टीचर्स है ना ही कॉलेज स्टाफ. ऐसे में इस बैच के स्टूडेंट्स का भविष्य खराब ना हो इसका ध्यान रखते उन्हें दूसरे मेडिकल कॉलेजों में शिफ्ट करने की योजना राज्य सरकार लेकर आई है. जिसके बाद छत्तीसगढ़ की बघेल सरकार ने मेडिकल कॉलेज को अधिग्रहण कर लिया था. 

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान स्टूडेंट्स की तरफ मौजूद वकील ने कोर्ट को बताया कि मेडिकल कॉलेज में फिलहाल 183 स्टूडेंट्स पढ़ाई कर रहे हैं. इन्हें अब दूसरे सरकारी मेडिकल कॉलेज में शिफ्ट किया जाना है. स्टूडेंट्स की तरफ से पैरवी कर रहे वकील किशोर भादुड़ी ने बताया कि राज्य में ऐसा पहली बार होगा जब किसी एक कॉलेज के स्टूडेंट्स को दूसरे कॉलेज में शिफ्ट किया जाएगा. उन्होंने कहा कि यह फैसला इस वजह से लिया गया है ताकि छात्रों का भविष्य खराब न हो. 

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