छत्तीसगढ़ में जूनियर डॉक्टर्स की मांगः दिक्कतें दूर नहीं हुई तो उठाएंगे यह बड़ा कदम
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छत्तीसगढ़ में जूनियर डॉक्टर्स की मांगः दिक्कतें दूर नहीं हुई तो उठाएंगे यह बड़ा कदम

मेडिकल कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि जूनियर डॉक्टर्स की जगह इमरजेंसी वार्ड  में कंसल्टेंट्स की ड्यूटी लगाई गई है.

छत्तीसगढ़ में जूनियर डॉक्टर्स की मांगः दिक्कतें दूर नहीं हुई तो उठाएंगे यह बड़ा कदम

रायपुर: छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में जूनियर डॉक्टर्स की हड़ताल जारी हैं. वहीं राजधानी रायपुर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल भीमराव आंबेडकर मेडिकल कॉलेज के केरीब 400 जूनियर डॉक्टर्स तीसरे दिन भी हड़ताल पर बैठे रहे. हालांकि आम मरीजों का पूरा चेकअप और उनकी दवाइयां देने से लेकर उनकी अच्छे से देखरेख इन्हीं डॉक्टर्स की निगरानी में हो रही थी, लेकिन अब उन्होंने अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ हल्ला बोल दिया है. दरअसल, काउंसिलिंग में देरी होने की वजह से गुस्से से लाल हुए जूनियर डॉक्टर्स ने आज दोपहर दो बजे तक ओपीडी, ऑपरेशन थिएटर और वार्ड में सेवाएं नहीं देने से मना कर दिया. साथ ही उनका ये भी कहना है कि आने वाले दिनों में अगर दिक्कतें दूर नहीं होती हैं तो जुडा इमरजेंसी सेवाएं भी बंद कर देगा.

मरीजों को नहीं होगी परेशानी 
हालांकि इस पूरे मामले में मेडिकल कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि जूनियर डॉक्टर्स की जगह इमरजेंसी वार्ड  में कंसल्टेंट्स की ड्यूटी लगाई गई है और हमारे मरीजों को किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं हुई है. वहीं इस पूरे मामले में जूनियर डॉक्टर अरविंद मीणा ने कहा कि एमडी-एमएस के पहले बैच के ऐकडेमिक सेशन 1 जून से शुरू हो जाने चाहिए. खैर इस साल पहले तो कोरोना के कारण परीक्षाएं शुरू करने में देरी हो गई. लेकिन आगे से ऐसा नहीं होना चाहिएय

वहीं रिजर्वेशन के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में केस पेंडिंग में है. सुप्रीम कोर्ट ने भारत सरकार से चार हफ्ते के अंदर  जवाब देने को कहा है. आपको बता जूनियर डॉक्‍टरों की मांग है कि सरकार जल्द से जल्द अपना जवाब सुप्रीम कोर्ट में  पेश करें ताकि इसका जल्द से जल्द ही सलूशन हो सके. आगे उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में प्रथम वर्ष द्वितीय वर्ष और तृतीय वर्ष को एक साथ मिलाकर हमेशा कुल 1800 डॉक्टर ही रहते हैं, जिससे मरीजों के इलाज में काफी सुविधा रहती है. काउंसलिंग में देरी की वजह से प्रथम वर्ष में जूनियर डॉक्टर्स नहीं हैं. इस कारण बाकी दो बैच पर काम दबाव बहुत ज्यादा है. साथ ही मरीजों को भी परेशानी हो रही है.

दरअसल, फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के बैनर तले देश में इस आंदोलन को चलाया जा रहा है. राष्ट्रीय स्तर पर संगठन के प्रतिनिधि सरकार ने काउंसलिंग शुरू करने पर दबाव भी बना रहे हैं. आपको बता दें कि पिछले एक साल से NEET-PG 2021 काउंसिलिंग में देरी हो रही है. इससे सेकेंड ईयर के सभी स्टूडेंट्स पर वर्क लोड बढ़ गया है. ये सिर्फ छत्तीसगढ़ की बात नहीं बल्कि पूरे देश में हो रहा है. फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के जरिए देश में आंदोलन चलाया जा रहा है. राष्ट्रीय स्तर पर संगठन के प्रतिनिधि सरकार ने काउंसलिंग को शुरू करने पर पूरा दबाव भी बना रहे हैं.

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