आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र पंडो, केंद्रीय मंत्री के सामने झलके आंसू

केंद्रीय मंत्री रेणुका सिंह भी बलरामपुर पहुंची, जहां उन्होंने सरकार की योजनाओं का हवाला देते हुए गांव के विकास की बात कह रही हैं. तो वहीं मामले में जिम्मेदार अधिकारी भी कह रहे हैं कि अब गांव में उचित व्यवस्था मुहैया कराई जाएगी.

आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र पंडो, केंद्रीय मंत्री के सामने झलके आंसू
फाइल फोटो

शैलेंद्र सिंह/बलरामपुर: छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले पंडो समुदाय आज भी मूलभूत समस्याओं से जूझ रहा है. जिले को ओडीएफ तो घोषित कर दिया गया है, लेकिन इनके गांव में एक भी शौचालय नहीं है. इसके साथ ही गांव में सड़क और स्कूल की व्यवस्था तक नहीं है, जिसके कारण पढ़ाई और दवाई के लिए ग्रामीणों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. 

केंद्रीय मंत्री रेणुका सिंह भी बलरामपुर पहुंची, जहां उन्होंने सरकार की योजनाओं का हवाला देते हुए गांव के विकास की बात कह रही हैं. तो वहीं मामले में जिम्मेदार अधिकारी भी कह रहे हैं कि अब गांव में उचित व्यवस्था मुहैया कराई जाएगी.

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आपको बता दें कि एक ओर जहां जिले के रामचंद्र पुर विकासखंड में राष्ट्रपति के दत्तक पुत्रों की एक महीने के भीतर 6 और 4 महीने में कुल 20 मौत हो चुकी है. जिसने राजधानी तक की राजनीति गरमा दी है. जिसके बाद विपक्ष सरकार पर हमलावर है और लगातार पंडो जनजाति पर शाशन द्वारा उपेक्षा का आरोप भी लगा रही है. घटना के बाद से जिला प्रशासन जहां एक ओर उन गांव में लगातार कैम्प लगाकर जागरूकता अभियान चला रही है ,लेकिन वाड्रफनगर विकासखंड के चरचरी गांव के लखार पारा में जहां 50 से 60 पंडो जनजाति की आबादी निवास करती है, वहां आज भी यह लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं.

ग्रामीणों ने बताया कि गांव में कोई भी स्कूल नहीं है जिसके कारण बच्चों को पढ़ाई के लिए दूर भेजना पड़ता है. इस कारण बच्चे शिक्षा से दूर होते जा रहे हैं. गांव में एक भी शौचालय नहीं है, प्रधानमंत्री आवास भी आधे अधूरे पड़े हैं. गांव में जब कोई बीमार होता है तो चारपाई के सहारे करीब 4 किलोमीटर तक पैदल ही ले जाना पड़ता है, यही कारण है कि ग्रामीण इलाज कराने की बजाय झाड़फूंक का सहारा लेते आ रहे हैं.गांव में एक हैंडपंप तो लगा है लेकिन पानी के लिए ग्रामीणों को काफी मेहनत करनी पड़ती है. जब हैंडपंप खराब हो जाता है तो ग्रामीणों को नदी और नाले का सहारा लेना पड़ता है.

आपको बता दें कि बलरामपुर जिले के रामचंद्रपुर विकासखंड अंतर्गत पिछले चार माह में विशेष संरक्षित 20 पंडो की मौत हो चुकी है. जिनकी मौत पर सियासत गरमाई हुई है.

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