रावण कहीं बुराई का प्रतीक तो यहां है रोजी-रोटी का जरिया!
X

रावण कहीं बुराई का प्रतीक तो यहां है रोजी-रोटी का जरिया!

सरकार द्वारा दशहरा समितियों और रावण (Ravana) दहन के लिए जो गाइडलाइंस (Corona Guidelines) जारी की गई हैं, उनके चलते इस बार पहले की तुलना में कम रावण दहन के आयोजन हो रहे हैं.

रावण कहीं बुराई का प्रतीक तो यहां है रोजी-रोटी का जरिया!

रजनी ठाकुर/रायपुरः आज विजयदशमी का त्यौहार है. बुराई पर अच्छाई की जीत के उपलक्ष्य में यह त्यौहार मनाया जाता है. हालांकि जिस रावण को बुराई का प्रतीक माना जाता है, वह भी आज कई परिवारों की रोजी रोटी का साधन बन गया है. बता दें कि छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सालों से रावण बाजार सजता है. बड़ी संख्या में लोग इस रावण बाजार से रावण खरीदने आते हैं. 

बता दें कि रायपुर में रावण बाजार सजने का इतिहास सालों पुराना है. प्रदेशभर से लोग यहां रावण का पुतला खरीदने आते हैं. इस बाजार में रावण का पुतला 100 रुपए से लेकर 15 हजार रुपए तक बिकता है. इस बाजार के चलते कई परिवारों की रोजी-रोटी चलती है. हालांकि इस साल कोरोना महामारी के चलते रावण बाजार की बिक्री पर असर पड़ा है. रावण का पुतला बनाने वाले कारीगरों का कहना है कि इस साल पिछले साल की तुलना में बिक्री कम हुई है. 

दरअसल सरकार द्वारा दशहरा समितियों और रावण दहन के लिए जो गाइडलाइंस जारी की गई हैं, उनके चलते इस बार पहले की तुलना में कम रावण दहन के आयोजन हो रहे हैं. इसका सीधा असर रावण का पुतला बनाने वाले कारीगरों पर पड़ा है. 

हमारी संस्कृति का हिस्सा रहा रावण दहन का यह त्यौहार अब एक बड़ा बाजार बन चुका है. दरअसल पहले बड़े-बड़े मैदानों में ही गिनी-चुनी जगहों पर रावण दहन किया जाता था लेकिन अब लोग अपनी-अपनी गली मोहल्लों में भी रावण दहन करने लगे हैं. इसके चलते रावण का पुतला बनाने वाले लोगों की आजीविका भी अच्छी हो गई है लेकिन इस साल कोरोना महामारी के चलते रावण का पुतला बनाकर अपना परिवार चलाने वाले ये कारीगर थोड़े निराश हैं. हालांकि उन्हें उम्मीद है कि अगले साल तक हालात पूरी तरह सामान्य हो जाएंगे तो रायपुर के इस रावण बाजार में फिर से पुरानी रौनक दिखाई देगी.

Trending news