ऐसा भी होता है! 20-25 पेड़ों को अधिकारियों ने समझ लिया लाखों पेड़, 40 साल तक अटका रहा बांध का काम
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ऐसा भी होता है! 20-25 पेड़ों को अधिकारियों ने समझ लिया लाखों पेड़, 40 साल तक अटका रहा बांध का काम

साल 1980 में सलफ जलाश्य बांध (Salaf Dam) का काम शुरू हुआ था. 

ऐसा भी होता है! 20-25 पेड़ों को अधिकारियों ने समझ लिया लाखों पेड़, 40 साल तक अटका रहा बांध का काम

बलराम नायक/गरियाबंदः हमारे देश में सरकारी तंत्र किस तरह से काम करता है, इसका जीता जागता उदाहरण गरियाबंद का सलफ जलाशय बांध निर्माण का मामला है. बता दें कि एक अधिकारी की लापरवाही की कीमत हजारों किसानों को चुकानी पड़ी और जलाश्य बांध निर्माण कार्य 40 सालों तक अटका रहा. अब जल संसाधन विभाग जल्द ही इस योजना पर काम शुरू करेगा, जिससे इलाके के किसानों को सिंचाई की सुविधा मिल सकेगी. 

क्या है मामला
बता दें कि साल 1980 में गरियाबंद के मैनपुर इलाके में किसानों को सिंचाई की सुविधा देने के लिए सलफ जलाश्य बांध का निर्माण कार्य शुरू किया था. यह जलाश्य बांध मैनपुर नगर से 4 किलोमीटर दूर फुलझर के ऊपर दो छोटी पहाड़ियों को जोड़कर बनाया जा रहा है. साल 1980 में काम शुरू होने के बाद तीन सालों तक लगातार बांध निर्माण का काम हुआ और 80 फीसदी काम भी पूरा हो गया था. इसके बाद अचानक से बांध निर्माण का काम रोक दिया गया और गुजरते वक्त के साथ उस बात को 40 साल गुजर गए हैं लेकिन अभी तक सलफ जलाश्य बांध का निर्माण कार्य रुका ही हुआ है!

सरकारी तंत्र की लापरवाही का नमूना
स्थानीय लोगों का कहना है कि पर्यावरण मंत्रालय की टीम जब इस बांध का निर्माण करने आई थी तो टीम के सदस्य बांध निर्माण स्थल जाने की बजाय गांव के ग्रामीणों से ही जानकारी लेकर चले गए. इस दौरान सरकारी विभाग की टीम ने ग्रामीणों से पूछा कि बांध निर्माण में कितने पेड़ डूब क्षेत्र में आ रहे हैं? इस पर ग्रामीणों ने आम बोलचाल की भाषा में बता दिया कि 20-25 लाख के पेड़ डूब क्षेत्र में आ रहे हैं. दरअसल स्थानीय बोलचाल की भाषा में कोसम के पेड़ों को लाख के पेड़ भी बोला जाता है क्योंकि इनसे लाख का उत्पादन होता है लेकिन पर्यावरण विभाग की टीम को लगा कि डूब क्षेत्र में 20-25 लाख पेड़ आ रहे हैं!

इस पर पर्यावरण विभाग की टीम ने बांध निर्माण का काम यह कहकर रुकवा दिया कि बांध निर्माण के लिए 20-25 लाख पेड़ नहीं काटे जा सकते. वो दिन है और आज का दिन बांध का काम ज्यों का त्यों रुका हुआ है. ग्रामीणों ने इस गलतफहमी को दूर करने के लिए सरकारी विभागों के कई चक्कर काटे, चक्का जाम और धरना प्रदर्शन किया लेकिन मजाल है कि सरकारी विभाग ने हकीकत जानकर इस दिशा में कोई पहल की हो! 

हैरानी की बात ये है कि बीते 40 सालों में चुनाव के दौरान भी यह मुद्दा उठा और राजनेताओं ने बांध निर्माण कार्य पूरा कराने के वादे भी किए लेकिन सब बेकार रहा. अब जाकर शायद सरकारी तंत्र की नींद खुली है या जो भी तकनीकी गलती थी, उसे दूर कर लिया गया है, और जल संसाधन विभाग ने योजना को पूरा करने के लिए प्रशासन को प्रस्ताव भेजा है. जल संसाधन विभाग के उप अभियंता का कहना है कि बांध का निर्माण 80 फीसदी हो चुका है और शासन से स्वीकृति मिलते ही नाला क्लोजर का काम शुरू कर दिया जाएगा. 

हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि की हो सकेगी सिंचाई
सलफ जलाश्य बांध का निर्माण पूरा होने से मैनपुर क्षेत्र के हजारों किसानों को इसका लाभ मिलेगा और हजारों हेक्टेयर जमीन की सिंचाई की समस्या दूर हो सकेगी. बांध निर्माण का काम शुरू होने की खबर से क्षेत्र के किसानों में उत्साह है, आखिर उनकी सालों से अटकी पड़ी मांग पूरी जो होने जा रही है!

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