बकरे की बलि को लेकर थाने पहुंचे दो पक्ष, पुलिस ने 'तीसरे' को देकर मामला ही खत्म कर दिया
X

बकरे की बलि को लेकर थाने पहुंचे दो पक्ष, पुलिस ने 'तीसरे' को देकर मामला ही खत्म कर दिया

छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में न्याय के लिए अब बकरे भी थाने में पहुंचने लगे हैं. ताजा मामला बिलासपुर के सिविल लाइन थाने का है. जहां दो पक्ष थाने पहुंचे गए. एक पक्ष का आरोप था कि दूसरा पक्ष बकरे को मगरपारा स्थित मरिमाई मंदिर में बलि देने जा रहे था.

बकरे की बलि को लेकर थाने पहुंचे दो पक्ष, पुलिस ने 'तीसरे' को देकर मामला ही खत्म कर दिया

शैलेंद्र सिंह ठाकुर/बिलासपुर: छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में न्याय के लिए अब बकरे भी थाने में पहुंचने लगे हैं. ताजा मामला बिलासपुर के सिविल लाइन थाने का है. जहां दो पक्ष थाने पहुंचे गए. एक पक्ष का आरोप था कि दूसरा पक्ष बकरे को मगरपारा स्थित मरिमाई मंदिर में बलि देने जा रहे था. इस पर दूसरे पक्ष ने सफाई दी, लेकिन बातचीत इतनी बढ़ गई मामला थाने तक पहुंच गया. 

मरिमाई मंदिर के मुख्य पुजारी और पूर्व महापौर उमाशंकर जायसवाल का कहना था कि मंदिर में बलि की प्रथा सालों से बंद है. बकरे की बलि नहीं दी जा रही थी. वहीं विरोध में थाने पहुंचे लोगों का आरोप है कि बलि देने वालों और पुजारी की मिलीभगत से मंदिर में बकरा ले जाया जा रहा था. 

अंधविश्वास की दौड़: यहां दहकते अंगारों पर दौड़ते हैं भक्त, किनारे खड़े लोग डालते हैं आग में घी

दोनों पक्षों की सिविल लाइन थाना प्रभारी के कमरे में जमकर बहस की. सिविल लाइन थाना प्रभारी ने दोनों पक्षों की बात सुनकर बकरे को एनजीओ को दे दिया. एनजीओ की सदस्यों ने लिखित में बकरा को अपने कब्जे में लिया और वहां से चले गए.

पूरे मामले में सिविल लाइन थाना प्रभारी शनिप रात्रे ने सूझबूझ से काम लिया. इस वजह से मामला खत्म हो गया, लेकिन इस बीच एनजीओ के सदस्यों की लापरवाही भी सामने आई. मीडिया से बात करते हुए उनके उल्टे सीधे जवाब सवालों को जन्म देने के लिए काफी है. बिलासपुर जिले में जगह-जगह मांस की दुकाने हैं. जब सदस्यों से पूछा गया कि उनको बंद करवाएंगे तो उनका जवाब रहा कि वे उस जगह से आंख बंद करके निकल जाते हैं.

WATCH LIVE TV

Trending news