मध्य प्रदेश चुनाव से पहले कांग्रेस करेगी नर्मदा मंत्रालय बनाने का ऐलान

सीएम शिवराज सिंह चौहान और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी नर्मदा के घाट पर पूजन करने के लिए आने वाले हैं.

मध्य प्रदेश चुनाव से पहले कांग्रेस करेगी नर्मदा मंत्रालय बनाने का ऐलान
राहुल गांधी 6 अक्टूबर को मध्य प्रदेश के दौरे पर जबलपुर में सरकार बनने पर नर्मदा मंत्रालय बनाने की घोषणा कर सकते हैं.

भोपाल: मध्य प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में सियासी दल अब नर्मदा की लहरों के सहारे अपनी चुनावी नैया पार लगाने के जुगाड़ में लग गए हैं. सीएम शिवराज सिंह चौहान और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी नर्मदा के घाट पर पूजन करने के लिए आने वाले हैं. इन सबके बीच कांग्रेस ने इससे एक कदम और आगे बढ़ने की तैयारी कर ली है. बताया जा रहा है कि मध्य प्रदेश में सरकार बनने पर कांग्रेस नर्मदा के लिए एक अलग मंत्रालय बनाएगी. राहुल गांधी 6 अक्टूबर को मध्य प्रदेश के दौरे पर जबलपुर में सरकार बनने पर नर्मदा मंत्रालय बनाने की घोषणा कर सकते हैं.

पीएम मोदी के गंगा मंत्रालय से ली प्रेरणा
कांग्रेस ने पीएम नरेंद्र मोदी के गंगा संरक्षण को लेकर बनाए गए गंगा मंत्रालय से प्रेरणा लेते हुए नर्मदा मंत्रालय बनाने की घोषणा करने का मन बना लिया है. बता दें कि देश में गंगा के प्रति आस्था के मद्देनजर पीएम मोदी का ये कदम सियासत का बेजोड़ दांव था. अब यही दांव विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस आज़मा रही है. कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि जबलपुर में राहुल गांधी की मौजूदगी में नर्मदा मंत्रालय का ऐलान होगा. बता दें कि राहुल गांधी नर्मदा नदी के पूजन के बाद एक सभा को संबोधित करेंगे. इसी सभा में कांग्रेस मध्य प्रदेश में सरकार बनने पर नर्मदा मंत्रालय बनाने का ऐलान करेगी. साथ ही नर्मदा नदी में अवैध उत्खनन रोकने और संरक्षण करने की घोषणा करेगी. कांग्रेस के अनुसार, नर्मदा नदी के नाम पर हुए घोटाले की जांच भी कराई जाएगी. 

शिवराज और दिग्विजय सिंह भी निकाल चुके हैं नर्मदा यात्रा
दरअसल, सीएम शिवराज ने दिसंबर 2016 से मई 2017 के दरमियान नर्मदा सेवा यात्रा निकालकर प्रदेश भर में नर्मदा के प्रति आस्था को भुनाया था. इसके बाद दिग्विजय सिंह ने यही दांव आजमाया और गैरराजनैतिक दर्जा देकर नर्मदा नदी की पैदल यात्रा की. इस यात्रा से दिग्विजय सिंह ने अपनी खत्म हो रही सियासी जमीन पर भरोसे की नई पौध उपजाने की कोशिश की. अब सॉफ्ट हिन्दुत्व की ओर बढ़ती कांग्रेस भी नर्मदा की तरफ उम्मीद की नजर से देख रही है. लिहाजा, जबलपुर में नर्मदा नदी के ग्वारी घाट पर नर्मदा पूजन करके नर्मदा मंत्रालय का ऐलान करने की तैयारी शुरू कर दी है.

नर्मदा नदी के महत्व को समझने से पहले एक नजर इन बातों पर डालिए:
राहुल गांधी 6 अक्टूबर को नर्मदा जा रहे हैं.
दिग्विजय सिंह नर्मदा परिक्रमा यात्रा कर चुके हैं.
शिवराज सिंह चौहान भी नर्मदा बचाओ यात्रा निकाल चुके हैं.
पीएम मोदी भी शिवराज की इस यात्रा के समापन समारोह में शामिल हो चुके हैं.
नर्मदा तट पर बसे जिले एमपी की 230 विधानसभा सीटों में 110 सीट कवर करते हैं.

आंकड़ों से समझिये कि कैसे नर्मदा नदी मध्यप्रदेश की सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक स्थितियों से सीधा सम्बन्ध रखती है.
अनूपपुर जिले में मैकल पर्वत के अमरकंटक शिखर से निकली देश की प्राचीनतम यह नदी शिव की प्रिय है.
अमरकंटक की पहाडि़यों से निकलकर छत्तीसगढ, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात से होकर करीब 1310 किलोमीटर का रास्ता तय कर भरूच के आगे खंभात की खाडी में विलीन हो जाती है.
मध्य प्रदेश में नर्मदा का प्रवाह क्षेत्र अमरकंटक(जिला अनूपपुर) से सोंडवा(जिला अलीराजपुर) तक 1077 किलोमीटर है, जो कि इसकी कुल लम्बाई का 82.24 प्रतिशत है.
मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी 16 जिलों, 51 विकासखण्डों, 600 ग्रामों, 1107 घाटों से होती हुई 1077 किलोमीटर का मार्ग तय करती है.
नर्मदा भारतीय प्रायद्वीप की सबसे प्रमुख और भारत की पांचवी बड़ी नदी है. इसकी कुल 21 सहायक नदियां हैं.
नर्मदा नदी के किनारे 290 प्रमुख प्राचीन मंदिर, 161 धर्मशालाएं, 263 आश्रम स्थित हैं.
नर्मदा विंध्याचल और सतपुड़ा पर्वतश्रृंखला के बीच से होते हुए पूर्व से पश्चिम की तरफ बहने वाली नदी है.