MP: दिव्यांग ने मांगा था घर, प्रशासन ने किया क्रूर मजाक, दिया खंडहर

बताया जा रहा है कि लंबे वक्त से उपस्वास्थ्य केंद्र का बंद पड़ा भवन दिव्यांग जीवन भूरिया को रहने के लिए दे दिया गया, लेकिन इसमें दिव्यांग जीवन भूरिया और उसके परिवार को जान का जोखिम हर पल बना रहता है.  

MP: दिव्यांग ने मांगा था घर, प्रशासन ने किया क्रूर मजाक, दिया खंडहर
दिव्यांग जीवन भूरिया को दिया गया आवास बेहद जर्जर स्थिति में है.

रतलाम: विश्व दिव्यांग दिवस (World Disability Day) पर हम आपको मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के रतलाम (Ratlam) के रहने वाले जीवन भूरिया के बारे में बताते हैं. जिनके साथ प्रशासन ने शासकीय मदद देने के नाम पर बेहद क्रूर मजाक किया है. ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि जो आवास उन्हें दिया गया वो बेहद जर्जर स्थिति में है. बताया जा रहा है कि लंबे वक्त से उपस्वास्थ्य केंद्र का बंद पड़ा भवन दिव्यांग जीवन भूरिया को रहने के लिए दे दिया गया, लेकिन इसमें दिव्यांग जीवन और उसके परिवार को जान का जोखिम हर पल बना रहता है.

दरअसल, 45 वर्षीय नामली निवासी जीवन भूरिया बचपन से दिव्यांग हैं. उनके दोनों पैर नहीं हैं. उनकी शादी भी एक दिव्यांग से ही हुई. इस दौरान, जीवन भूरिया का दिव्यांगता से लड़ते हुए संघर्ष लगातार जारी रहा. हार नहीं मानते हुए आजीविका के लिए जीवन भूरिया ने पंचर बनाने का काम शुरू किया. जिसकी आमदनी से परिवार का भरण पोषण होता है. साथ ही दिव्यांग जीवन भूरिया अपने बच्चों को पढ़ा लिखा भी रहे हैं. लेकिन, जीवन भूरिया के पास घर नहीं था, जिसकी आस शासन-प्रशासन से लगाई.

ढाई साल पहले प्रशासन ने जीवन को झोपड़ी से एक बंद पड़ा भवन रहने को दिया. लेकिन, इसे सिस्टम की लाचारी कहें या लापरवाही कि एक दिव्यांग जो पहले से जीवन संघर्ष कर रहा था उसे आवासीय मदद के नाम पर खंडहर दे दिया. जीवन भूरिया जिस शासकीय भवन में रहते हैं, उसकी छत और दीवार के कोने हर रोज परत-दर-परत गिरते जा रहे हैं. छत के सरिए नजर आने लगे हैं, सीलन की वजह से दीवारों पर घास उग आई है. 

जीवन पिछले 18 माह से शासकीय योजना में आवास के लिए प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं. जीवन भूरिया के पास एक छोटे सा भूखंड है. जिस पर शासकीय मदद से आवास बनाने के लिए नामली नगर परिषद से लेकर जिला मुख्यालय तक हर माह जीवन चक्कर लगाते हैं. लेकिन दिव्यांग की सुध लेने वाला कोई नहीं है. अब तो दिव्यांग जीवन भूरिया को भी लगने लगा है कि उसके सामने सिस्टम ज्यादा लाचार और दिव्यांग है.