छत्तीसगढ़ः जिला प्रशासन ने 11 सौ की आबादी वाले गांव को घोषित कर दिया वीरान, ग्रामीणों ने जताई नाराजगी

 ग्रामिणों का सीधा आरोप है कि राजनैतिक साजिश के तहत उनके गांव को आबादी विहीन घोषित किया गया है. क्योंकि आगामी दिनों में ग्राम पंचायत स्तर के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने वाली है .

छत्तीसगढ़ः जिला प्रशासन ने 11 सौ की आबादी वाले गांव को घोषित कर दिया वीरान, ग्रामीणों ने जताई नाराजगी

रायपुरः जांजगीर-चांपा जिले मे एक गांव को जिला प्रशासन ने आबादी विहीन मतलब वीरान घोषित कर दिया है, जबकि गांव की आबादी 1100 है. प्रशासन के इस कदम से ग्रामवासियों मे आक्रोष नजर आ रहा है. ग्रामिणों का सीधा आरोप है कि राजनैतिक साजिश के तहत उनके गांव को आबादी विहीन घोषित किया गया है. क्योंकि आगामी दिनों में ग्राम पंचायत स्तर के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने वाली है और शासन के नियमों के अनुरूप उनके गांव की आबादी ग्राम पंचायत बनने के लिए पर्याप्त है.

जांजगीर-चांपा जिले के बम्हनीडी ब्लाक के ग्राम पंचायत सिलादेही के आश्रित ग्राम मौहाडीह की आबादी 11 सौ से अधिक है, लेकिन शासन के रिकॉर्ड मे इसे वीरान घोषित कर दिया गया है. साथ ही पूरी आबादी को सिलादेही पंचायत मे समायोजित कर दिया गया है. ग्रामिणों का आरोप है कि उनके साथ यह नाइंसाफी राजनीतिक साजिश के तहत की गई है, ताकि उनका गांव ग्राम पंचायत ना बन सके, जबकि शासन के गाईड लाईन के तहत 1 हजार से ऊपर के आबादी वाले गांवो को ग्राम पंचायत का दर्जा दिया जा सकता है.

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ग्रामिणों का कहना है कि उनके गांव का विकास पूरी तरह से बाधित है और वे चाहते हैं की उनका गांव ग्राम पंचायत बने, ताकि गांव विकास की मुख्य धारा में शामिल हो सके. ग्रामिणों ने बताया कि अचानक 16 सितंबर को किसी ने गांव के एक दुकान के बाहर जिला प्रशासन का आदेश चश्पा कर दिया, जिसमें गांव को आबादी विहीन दर्शाया गया था, तब से गांव मे असंतोष का माहौल है और ग्रामीण अपने गांव का अस्तित्व बचाने हर स्तर की लड़ाई लड़ने तैयार हैं.

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इस मामले में जिला प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि 2011 के जनगणना के अनुसार गांव को वीरान घोषित किया गया है और ग्रामीण अगर आपत्ति करते हैं तो निराकरण किया जाएगा. जबकि इस मामले मे ग्रामीण एसडीएम के आपत्ति दर्ज करा चुके हैं मगर कोई कार्यवाई नहीं की गई है. वहीं गांव के लोगों के पास लगभग 50 साल सरकार का आबादी वाला पट्टा भी मौजूद है. इसलिए 2011 की जनगणना में भी यह गांव वीरान साबित नहीं होता है.