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MP में नहीं थम रहा बारिश का कहर, बाढ़ के अलर्ट के बाद 45 हजार लोग बचाव शिविरों में पहुंचे

प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश और नदियों-बांध का पानी बस्तियों, घरों तक पहुंचने से बाढ़ के हालात बन गए हैं. इस बीच लगभग 45 हजार लोगों को राहत और बचाव शिविरों में शरण लेनी पड़ी.

MP में नहीं थम रहा बारिश का कहर, बाढ़ के अलर्ट के बाद 45 हजार लोग बचाव शिविरों में पहुंचे
प्रतीकात्मक तस्वीर

भोपाल: देश के कई राज्यों में मौसम कहर बनकर लोगों की जिंदगी पर हावी हो रहा है. मध्य प्रदेश के कई शहरों में बारिश की वजह से लोगों को अपने घरों को छोड़कर राहत और बचाव शिविरों में शरण लेनी पड़ रही है. प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश और नदियों-बांध का पानी बस्तियों, घरों तक पहुंचने से बाढ़ के हालात बन गए हैं. इस बीच लगभग 45 हजार लोगों को राहत और बचाव शिविरों में शरण लेनी पड़ी. बाढ़ के हालात देखते हुए सेना को भी सतर्क किया गया है. नीमच में राहत और बचाव दल ने 150 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला है. इसके अलावा मंदसौर में बाढ़ का पानी आ जाने से लोगों को छत पर शरण लेनी पड़ी. 

आईएएनएस के अनुसार, राज्य के 36 जिलों में बाढ़ का असर है. इन जिलों में राहत और बचाव के काम तत्काल शुरू किए गए हैं. राज्य आपदा मोचक बल (एसडीआरएफ) और राष्ट्रीय आपदा मोचक बल (एनडीआरएफ) के साथ स्थानीय जिला प्रशासन को सक्रिय है. प्रभावित क्षेत्र में 255 जिला आपदा रिस्पांस सेंटर और 51 आपात ऑपरेशन सेंटर खोले गए, जो 24 घंटे काम कर रहे हैं. एसडीआरएफ के 100 और 600 प्रशिक्षित होमगार्ड के जवान बचाव कार्य में लगाए गए हैं. एनडीआरएफ के 210 तथा 1500 हजार होमगार्ड और पुलिस के जवान राहत और बचाव कार्यो में लगे हैं. 

CM कमलनाथ ने लिया बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को लेकर जारी किए निर्देश, बचाव कार्य जारी

Weather Report

राहत और बचाव कार्य में लगा प्रशासन 
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने राहत और बचाव कार्य में लगे दलों के अलावा प्रशासनिक अमले से प्रभावितों की हर संभव मदद के निर्देश दिए हैं. साथ ही नुकसान का आकलन किए जाने के लिए केंद्र सरकार से दल भेजने का आग्रह किया. साथ ही बाढ़ प्रभावित जिलों को 100 करोड़ रुपये की सहायता स्वीकृत की है, ताकि प्रभावितों के रहने, खाने तथा अन्य नुकसान की भरपाई की जा सके. आपदा और बचाव कार्य पर 325 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं. 

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इन जिलों में मची है सबसे ज्यादा तबाही 
बाढ़ का सबसे ज्यादा असर मंदसौर जिले में है. यहां गांधी सागर बांध और चंबल नदी का पानी घुस रहा है. यहां बाढ़ से 12 हजार 800 लोग प्रभावित हुए हैं, जिनमें से 10 हजार लोगों को राहत कैम्प में ठहराया गया है. पूरे जिले में 53 राहत कैम्प स्थापित किए गए हैं. आवागमन ठप्प हो जाने से मार्ग में फंसे 470 लोगों को राहत शिविरों में ठहराया गया है, जहां उन्हें सोने और भोजन आदि की सुविधा उपलब्ध करवाई गई. इसी तरह नीमच जिले में 150 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया. राहत और बचाव दलों ने रतलाम में 250, आगर मालवा में 750 को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया. श्योपुर जिले के 12 गांवों में फंसे लोगों को शिविरों में भेजा गया है। दमोह और रायसेन में भी राहत और बचाव कार्य जारी है.