धमतरी में भी धान खरीदी की शुरुआत, लेकिन अव्यवस्थाएं देख किसान नाराज़

धान बेचने आ रहे किसान सोसाइटियों में अव्यवस्थाओं के आलम से काफी नारज़ हैं. किसानों का आरोप है कि धान रखने के लिए ना ही समतलीकरण ठीक से किया गया, न ही पानी और शौचालय की व्यावस्था की गई है. 

 धमतरी में भी धान खरीदी की शुरुआत, लेकिन अव्यवस्थाएं देख किसान नाराज़
धान बेचने आ रहे किसान सोसाइटियों में अव्यवस्थाओं के आलम से काफी नारज़ हैं.

धमतरी: छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के सभी जिलों में आज से धान खरीदी की शुरूआत हो चुकी है. काफी दिनों के इंतजार के बाद किसान अपनी उपज बेचने पहुंच रहे हैं. धमतरी (Dhamtari) में शुभ मुहूर्त में पूजा-पाठ कर सोसाइटियों में धान खरीदी की शुरूआत की गई. सुबह से ही धान बेचने वाले किसानों में काफी उत्साह देखने को मिला. लेकिन, अव्यवस्था ने जल्दी ही उनके हौसले पस्त कर दिए. सोसाइटियों में सही इंतजाम ना होने से किसान काफी नाराज़ दिखे. किसानों का आरोप है कि धान रखने के लिए ना ही समतलीकरण ठीक से किया गया, न ही पानी और शौचालय की व्यवस्था की गई है. 

बता दें कि, धमतरी में 85 खरीदी केन्द्र बनाए गए हैं. जहां पर किसान अपना धान बेच सकते हैं. जिले में 105470 किसानों का पंजीयन हुआ है. साथ ही धमतरी में 4 लाख 28 हजार मेट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य रखा गया है. हालांकि, प्रशासन अपनी तैयारियां पूरी होने का दावा कर रहा है. प्रशासन की ओर से सोसाइटी पहुंचने वाले किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो इसके लिए पानी, शौचालय, तराजू-बट की व्यवस्था पूरी होने की बात कही गई है. लेकिन, किसानों की नाराज़गी प्रशासन के दावों की पोल खोल रही है.

बता दें कि छत्तीसगढ़ में 2048 खरीदी केंद्रों के साथ 48 मंडियों और 76 उपमंडियों में धान की खरीदी हो रही है. इस साल 54 नए खरीदी केंद्र बनाए गए हैं. 15 फरवरी 2020 तक प्रदेश में धान की खरीदी की जाएगी. सभी केंद्रों पर 1815 और 1835 रुपए की दर से धान की खरीदी होगी. इस बार सरकार ने 85 लाख मेट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य रखा है. किसानों को किसी तरह की दिक्कत न हो इसके लिए सभी केन्द्रों पर एक टोल फ्री नंबर भी लगाया गया है. बड़े किसानों के लिए अधिकतम पांच बार धान बेचने की परमिशन दी गई है. आंकड़ों के मुताबिक इस बार प्रदेश के 19 लाख 56 हजार किसानों ने धान बेचने के लिए पंजीकरण कराया है, जो कि पिछले साल के मुकाबले दो लाख 58 हजार ज्यादा है. 

गौरतलब है कि कांग्रेस सरकार ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में 2500 रु समर्थन मूल्य में धान खरीदने की बात की थी. जिस पर सियासत भी खूब हुई, सरकार और उनके मंत्री अपने भाषणों में 2500 रुपए में धान खरीदी करने का दावा करते रहे. लेकिन, धान की खरीदी फिलहाल न्यूनतम समर्थन मूल्य(MSP) पर ही की जा रही है जिससे किसानो में भी काफी मायूसी देखने को मिल रही है. हालांकि दावा किया जा रहा है कि बाकी बचे पैसों को देने के लिए सरकार ने समिति गठित की है और जल्दी ही किसानों को उनकी बकाया रकम दे दी जाएगी.