फ्री LED बल्ब देकर बैंक खातों से उड़ाए 18 लाख, एक लाख लोगों का डिजिटल डेटा भी चोरी, ठगी का तरीका हैरान करने वाला

ऑनलाइन ठग गिरोह के सदस्यों द्वारा फ्री में एलईडी बल्ब देने के साथ पेटीएम खाता खोलने का झांसा देकर खाता धारक के पास से आधार कार्ड की फोटो कॉपी के साथ उनके अंगूठे के निशान ले लिए जाते थे. बाद में उस फिंगरप्रिंट को स्कैन कर रबड़ स्टांप बनवा लिया जाता है.

फ्री LED बल्ब देकर बैंक खातों से उड़ाए 18 लाख, एक लाख लोगों का डिजिटल डेटा भी चोरी, ठगी का तरीका हैरान करने वाला
सांकेतिक तस्वीर

प्रदीप शर्मा/भिंडः भिंड जिले में मुफ्त में एलईडी बल्ब देने के नाम पर धोखाधड़ी करने का मामला सामने आया है. गुजरात की कंपनी द्वारा भोले-भाले ग्रामीणों को मुफ्त में एलईडी देने के नाम पर उनके आधार कार्ड का डेटा और फिंगरप्रिंट के निशाना लेकर कई लोगों के खातों से ट्रांजेक्शन कर पैसे निकाल लिए गए. जिले में करीब 1 लाख लोगों का डिजिटल डेटा चोरी हुआ है, जिसकी वजह से माना जा रहा है कि उनके बैंक खाते अब सुरक्षित नहीं रहे हैं. 

नवंबर से शुरू हुआ घटनाक्रम 
डीएसपी हेड क्वार्टर और साइबर सेल प्रभारी मोतीलाल कुशवाहा के ने बताया कि यह पूरा घटनाक्रम नवंबर महीने में शुरू हुआ था. उस दौरान लगातार भिंड जिले के ऊमरी, रौन, मिहोना और लहार पुलिस थानों में एक के बाद एक खातों से रुपए कटने की कई शिकायतें सामने आई. इन सभी शिकायतों में फरियादियों द्वारा एक कॉमन बात यह थी कि लॉकडाउन के दौरान मई 2020 से सितंबर 2020 के दौरान कुछ युवकों द्वारा मुफ्त में एलईडी बल्ब देने के नाम पर ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों से उनके आधार नंबर और अंगूठों के निशान लिए गए थे. जिसके बाद पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू की. 

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गुजरात की कंपनी को भेजी जानकारी 
इस ऑनलाइन फ्रॉड और डेटा लीक केस के तार गुजरात से जुड़े थे, क्योंकि चारों युवकों ने गुजरात की एक कंपनी उत्कर्ष ह्यूमन रिसोर्सेड प्राइवेट लिमिटेड के लिए लोगों के आधार कार्ड नंबर और फिंगरप्रिंट कलेक्ट किये थे, जिसके लिए कंपनी द्वारा इन युवकों को प्रति व्यक्ति के डेटा के हिसाब से कुछ रुपये दिए जा रहे थे. इस तरह चारों युवकों ने चार माह में करीब एक लाख से ज्यादा लोगों को मुफ्त एलईडी बल्ब का झांसा देकर उनके फिंगरप्रिंट और आधार नंबर ले लिये. इन चारों ने यह जानकारी कंपनी को ईमेल के जरिए भेज दी. जिसके बाद से ही लगातार लोगों के खातों से पैसे कटना शुरू हो गए. पुलिस ने बताया कि नवंबर महीने से अब तक 70 से ज्यादा लोगों ने खातों से पैसे निकाले जाने की शिकायत दर्ज कराई है. इन शिकायतकर्ताओं के 18 लाख से ज्यादा रुपये चोरी हो चुके हैं. 

इस तरह लेतें थे फिंगरप्रिंट और आधार कार्ड की जानकारी 
ऑनलाइन ठग गिरोह के सदस्यों द्वारा फ्री में एलईडी बल्ब देने के साथ पेटीएम खाता खोलने का झांसा देकर खाता धारक के पास से आधार कार्ड की फोटो कॉपी के साथ उनके अंगूठे के निशान ले लिए जाते थे. बाद में उस फिंगरप्रिंट को स्कैन कर रबड़ स्टांप बनवा लिया जाता है. जैसे कि ज्यादातर बैंक खाते आधार नंबर से लिंक हैं, ऐसे में आधार की जानकारी भरने के बाद ही बैंक खाते को खोलता है. जैसे ही उसमें खाताधारक के अंगूठा लगाने का ऑप्शन आता है. वैसे ही रबर स्टैंप लगाकर अंगूठे का निशान दे दिया जाता है और उस खाते से रुपये निकाल लिए जाते हैं. 

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इस तरह हुआ मामले का खुलासा 
पुलिस ने बताया कि खातों से निकाली गई राशि के संबंध में जांच करने पर उसके तार गुजरात के अहमदाबाद से जुड़े थे. जिसके बाद अहमदाबाद पुलिस से संपर्क किया गया, खास बात यह थी कि जो भी राशि का आहरण किया गया. वह ऑनलाइन वॉलेट, ईजी पे पर पेटीएम और अन्य माध्यम के जरिए किया गया था. ठग गिरोह के सदस्य लोगों का डाटा इस्तेमाल कर पैसा उनके खातों से ऑनलाइन वॉलेट में ट्रांसफर कर लेते थे. इस तरह के फ्रॉड का एक मामला अहमदाबाद में भी हुआ था, जिसके आधार पर गुजरात पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार भी किया. जिसके बाद भिंड पुलिस ने भी इसी आधार पर मामले की जांच की. जिसमें लहार जिले के चार लड़कों को गिरफ्तार किया गया जिसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ. 

इस पूरे ऑनलाइन फ्रॉड में भिंड जिले के एक लाख से ज्यादा लोगों को शिकार बनाया गया है. जिससे अब उनका डेटा सुरक्षित नहीं माना जा रहा.  यह लोग भिंड के अलावा दतिया, ग्वालियर, सागर, मंडला और उत्तर प्रदेश के ग्रामीण अंचल में भी सक्रिय हैं. खास बात यह है कि हर व्यक्ति के खाते की सुरक्षा के लिए उसका आधार नंबर और अंगूठे का निशान यानी फिंगरप्रिंट सबसे अहम माने जाते हैं. शिकायतकर्ताओं को इस बात की चिंता है कि उनका डाटा अब सुरक्षित नहीं है. जबकि पुलिस उन्हें अब तक गिरफ्तार नहीं कर पाई है. 

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