'देश का दिल' मांगे मोर: बेन किंग्सले वाला नहीं 'करेंसी नोट वाला गांधी' चाहे

गांधी जी की ऐसी प्रतिमाएं लगाने का विरोध सिर्फ बैतूल में नहीं हो रहा. इससे पहले सिहोर और रीवा के कॉलेजों में भी बेन किंग्सले से मिलती जुलती गांधी जी की प्रतिमा लगाने का विरोध हो चुका है

'देश का दिल' मांगे मोर: बेन किंग्सले वाला नहीं 'करेंसी नोट वाला गांधी' चाहे
छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद कर रहा विरोध

इरशाद हिंदुस्तानी/बैतूल: मध्य प्रदेश में महात्मा गांधी की जगह 1982 में उन पर बनी फिल्म 'गांधी' में उनका किरदार निभाने वाले हॉलीवुड कलाकार बेन किंग्सले की मूर्ति लगाने का सिलसिला जैसे जैसे शहर दर शहर पहुंच रहा है, वैसे-वैसे ये मामला तूल पकड़ता जा रहा है. 

ताजा मामला बैतूल का है. बैतूल के सबसे बड़े कॉलेज 'जे एच पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज' के छात्रों ने ये ऐलान कर दिया है कि वो कॉलेज में गांधी जी की प्रतिमा को लेकर कोई भी आयोजन नहीं होने देंगे. छात्रों का आरोप है कि उनके कॉलेज में गांधी जी की जो प्रतिमा लगाई गई है उसका चेहरा राष्ट्रपिता गांधी से नहीं बल्कि हॉलीवुड कलाकार बेन किंग्सले के 'गांधी' फिल्म के किरदार से मिलता है. दिलचस्प ये भी है कि गांधी जी की ऐसी प्रतिमाओं को लगाने की कवायद सरकारी पहल का हिस्सा बताई जा रही है, लेकिन उन्हें लगाने का विरोध राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ा छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) कर रहा है. कमाल ये भी है कि कॉलेज प्रबंधन गांधी जी के 'प्रेम' में उनकी 'गलत प्रतिमा' लगाने का विरोध कर रहे छात्रों से गांधी जी की दूसरी छवियां देखने की सलाह भी दे रहा है. वहीं छात्र तो गांधी जी की वही छवि देखना चाहते हैं जो वो बचपन से अब तक करेंसी नोट पर देखते आए हैं.
 

कहां-कहां विरोध?
गांधी जी की ऐसी प्रतिमाएं लगाने का विरोध सिर्फ बैतूल में नहीं हो रहा. इससे पहले सिहोर और रीवा के कॉलेजों में भी बेन किंग्सले से मिलती जुलती गांधी जी की प्रतिमा लगाने का विरोध हो चुका है. दरअसल, मध्य प्रदेश के अलग-अलग शहरों में सरकारी कॉलेजों में गांधी जी प्रतिमाएं लगाने की कवायद चल रही है. हालांकि ये कवायद नई नस्ल को गांधी जी के विचारों के और करीब लाने के लिए थी, लेकिन अब जगह-जगह इसका विरोध शुरू हो चुका है. 

बेन किंग्सले जैसे गांधी के पीछे 'घोटाला'?   
इस बीच इस विवाद के पीछे-पीछे घोटाले के आरोप भी चले आए हैं. आरोप है कि मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश के कॉलेजों में गांधी जी की प्रतिमाएं लगवाने का ठेका एक ही सप्लायर को दिया है. इसीलिए जहां-जहां गांधी जी की प्रतिमा लगाई जा रही है वहां-वहां एक जैसी ही प्रतिमा लग रही है जिसका चेहरा गांधी जी की नोट वाली छवि से नहीं मिलता. हालांकि 'जे एच पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज' के प्रिंसिपल विजेता चौबे का कहना है कि गांधी की प्रतिमा के लिए मूर्तिकार को बाकायदा उनकी एक तस्वीर मुहैया कराई गई थी. उनकी प्रतिमा लगाने का फैसला सरकारी खरीद का हिस्सा नहीं है.
 

हे राम! गांधी तेरे देश में...
इस विवाद में गांधी जी के अलग-अलग 'चेहरे' ही नहीं बदले बल्कि विचारधारा से जुड़े किरदार भी बदल गए. संघ से जुड़े छात्र संगठन ABVP की दलील है कि कांग्रेस अपने प्रेरणास्रोत की ही सही प्रतिमा नहीं लगवा पा रही. कांग्रेस के लिए ये बहुत शर्मनाक है.