छत्तीसगढ़ में गोधन न्याय योजना के साथ ही शुरू हुई 'गोबर' पॉलिटिक्स

छत्तीसगढ़ में "गोबर" पॉलिटिक्स शुरू हो गई है. पूर्व पंचायत मंत्री अजय चंद्राकर ने ट्वीट कर योजना पर सवाल उठाते हुए गोबर को राजकीय प्रतीक चिन्ह बनाने का सुझाव दिया है, तो वहीं कांग्रेस ने भी पलटवार करते हुए चंद्रकार सहित अन्य बीजेपी नेताओं को दिमाग में भरे गोबर को इस योजना के तहत बेचकर आर्थिक लाभ कमाने को कह दिया.

छत्तीसगढ़ में गोधन न्याय योजना के साथ ही शुरू हुई 'गोबर' पॉलिटिक्स
फाइल फोटो

रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा 'गोधन न्याय योजना' लॉन्च करते ही प्रदेश में "गोबर" पॉलिटिक्स शुरू हो गई है. पूर्व पंचायत मंत्री अजय चंद्राकर ने ट्वीट कर योजना पर सवाल उठाते हुए गोबर को राजकीय प्रतीक चिन्ह बनाने का सुझाव दिया है, तो वहीं कांग्रेस ने भी पलटवार करते हुए चंद्रकार सहित अन्य बीजेपी नेताओं को दिमाग में भरे गोबर को इस योजना के तहत बेचकर आर्थिक लाभ कमाने को कह दिया.

बताया जा रहा है कि यह ट्विटर वार यहीं नहीं रुका बल्कि दोनों पार्टियों के प्रवक्ताओं के बीच अब जुबानी जंग शुरू हो गई है. कांग्रेस प्रवक्ता रमेश वर्लियानी ने अजय चंद्राकर के मानसिक संतुलन पर सवाल उठाया है. तो वहीं दूसरी ओर बीजेपी प्रवक्ता सच्चिदानंद उपासने का कहना है कि कांग्रेस प्रदेश में सब गुड़-गोबर करने के लिए गोबर पर इतना जोर दे रही है.

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आपको बता दें कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर हरेली त्योहार से छत्तीसगढ़ में गोबर खरीदने के लिए गोधन न्याय योजना की शुरुआत की थी.

इस योजना को अमल में लाने के लिए सरकार ने 5 मंत्रियों की समिति और अधिकारियों की एक अन्य समिति भी बनाई है. मंत्रिमंडल की समिति गोबर खरीदने की दर तय करेगी, जबकि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनी समिति गोबर से बनी खाद खरीदने की व्यवस्था करेगी.

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