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हनीट्रैप गैंग के ठिकानों से मिले सरकारी विभाग के सील, सरकारी टेंडर में फर्जीवाड़े के लिए होता था इस्तेमाल

सूत्रों के हवाले से मिली खबर के मुताबिक श्वेता विजय जैन के घर से जमीनों के सौदे के कागज भी बरामद किए गए हैं और अब आरोपियों पर सरकारी सील के दुरुपयोग का एक और केस दर्ज हो सकता है.

हनीट्रैप गैंग के ठिकानों से मिले सरकारी विभाग के सील, सरकारी टेंडर में फर्जीवाड़े के लिए होता था इस्तेमाल
(फाइल फोटो)

नई दिल्लीः मध्यप्रदेश में सियासी भूचाल लाने वाले हनीट्रैप गैंग के प्रशासनिक रसूख का खुलासा हुआ है. सूत्रों के मुताबिक तलाशी अभियान के दौरान पुलिस ने श्वेता विजय जैन समेत दूसरे आरोपियों के ठिकानों से 4 सरकारी सील और ठप्पे बरामद किए हैं. जिनका इस्तेमाल सरकारी टेंडर के काम में फर्जी साइन के जरिए किया गया है. इसके साथ ही पुलिस ने कुछ इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स भी जब्त किए गए हैं. सूत्रों के हवाले से मिली खबर के मुताबिक श्वेता विजय जैन के घर से जमीनों के सौदे के कागज भी बरामद किए गए हैं और अब आरोपियों पर सरकारी सील के दुरुपयोग का एक और केस दर्ज हो सकता है.

वहीं मध्य प्रदेश में पकड़े गए हनीट्रैप कांड में मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम को मुख्यमंत्री कमलनाथ ने तीसरी बार बदला है, जिससे अब मध्य प्रदेश के मुखिया पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं. सबसे पहले जांच श्रीनिवास वर्मा को सौंपी गई थी, लेकिन बाद में यह जिम्मेदारी उनसे लेकर संजीव शामी को दे दी गई और अब यह जिम्मेदारी संजीव शामी से लेकर राजेंद्र कुमार को सौंप दी गई है.

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बता दें इससे पहले मामले को लेकर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अफसरों की जमकर क्लास ली थी. मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव एसआर मोहंती, डीजीपी वीके सिंह और एटीएस चीफ संजीव शमी को सीएम हाउस में तलब किया. मुख्यमंत्री कमल नाथ ने अफसरों से सवाल किया कि हनी ट्रैप कोई आतंकी गतिविधि तो हैं नहीं, फिर इसकी जांच में एंटी टेररिस्ट स्कवॉड (एटीएस) कहां से आ गई? एटीएस हनी ट्रैप का खुलासा करने के लिए तीन महीने से किसकी अनुमति लेकर सर्विलांस कर रही थी? आखिर यह सब क्या चल रहा है?