मध्य प्रदेश में सरकारी रिकॉर्ड से गायब हो गई 42 लाख हेक्टेयर जमीन, जानिए पूरा मामला

शहडोल में 1980 के पहले 13,55,066 हेक्टेयर जमीन सरकारी थी. जो वर्ष 2000 में 6 लाख 44 हजार 964 हेक्टेयर ही रह गई है. 

मध्य प्रदेश में सरकारी रिकॉर्ड से गायब हो गई 42 लाख हेक्टेयर जमीन, जानिए पूरा मामला

भोपाल: मध्य प्रदेश में सरकारी जमीनों के रिकॉर्ड में एक बड़ी गड़बड़ी सामने आई है. राजस्व विभाग के एक पत्र से यह सामने आया है कि प्रदेश में 42 लाख हेक्टेयर भूमि सरकारी रिकॉर्ड से गायब हो गई है. जमीन सरकारी रिकार्ड से गायब कैसे हो गई, इसका अभियान चलाकर पता लगाया जा रहा है. इसके लिए सभी जिला कलेक्टरों को पत्र भी लिखा गया है. वहीं, कलेक्टरों ने अपने जिले के सभी तहसीलदारों को पत्र लिखकर 10 दिन के अंदर गायब हुए जमीन के रिकॉर्ड का पता लगाने का आदेश दिया है. यह पूरी जमीन सन 1980 से 2000 के बीच सरकारी रिकॉर्ड से गायब हुई है.

शहडोल में सबसे ज्यादा जमीन गायब
सबसे ज्यादा जमीन शहडोल, सीधी, शिवपुरी, बालाघाट और छिंदवाड़ा की गायब हुई है. यहां पांच लाख हेक्टेयर से लेकर दो लाख हेक्टेयर तक जमीन का रिकार्ड 1980 से 2000 के बीच का नहीं मिल पा रहा है. शहडोल में 1980 के पहले 13,55,066 हेक्टेयर जमीन सरकारी थी. जो वर्ष 2000 में 6 लाख 44 हजार 964 हेक्टेयर ही रह गई है. इसी तरह 20 साल में 5 लाख 41 हजार 042 हेक्टेयर जमीन का रिकार्ड नहीं मिल पा रहा है. इसी तरह इंदौर, होशंगाबाद और विदिशा में रिकॉर्ड ठीक है. सागर में 407, उज्जैन में 663 व देवास में 985 हेक्टेयर जमीन का रिकार्ड नहीं मिल पा रहा है.

रिकॉर्ड से सरकारी जमीन गायब होने पर उठ रहे हैं सवाल
- मौके पर जमीन निजी तो नहीं हो गई?
- रिकार्ड से जमीन किसने गायब की?
- राजस्व रिकार्ड से इन जमीनों के गायब होने की मुख्य वजह क्या है?
- किसे लाभ या किसे नुकसान पहुंचाने के लिए यह जमीन गायब की है?

मध्य प्रदेश में 42 लाख हेक्टेयर जमीन सरकारी रिकॉर्ड से गायब होने के मामले में मप्र के राजस्व मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने ZEE एमपीसीजी से बातचीत में कहा कि जमीन गायब नही हुई होगी. कहीं अतिक्रमण हुआ होगा. हम सीमांकन करवाएंगे. वो जमीन हमको मिलेगी. उन्होंने कहा कि हालांकि, यह जांच का विषय है. गंभीर मुद्दा है. जांच में दोषी कोई पाया जाता है तो, उस पर कार्रवाई होगी.