प्रहलाद लोधी मामला: गवर्नर ने विधानसभा अध्यक्ष को बुलाया, नहीं आने पर EC से मांगी सलाह

नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि लोवर कोर्ट का आदेश मानने में विधानसभा अध्यक्ष को केवल दो घंटे लगे. वहीं, हाईकोर्ट का आदेश मानने में महीना भर लगता दिख रहा है.

प्रहलाद लोधी मामला: गवर्नर ने विधानसभा अध्यक्ष को बुलाया, नहीं आने पर EC से मांगी सलाह
बीजेपी विधायक प्रहलाद लोधी को तहसीलदार से मारपीट और बलवे के मामले में भोपाल की विशेष अदालत ने दोषी ठहराया था. हालांकि, उन्हें हाईकोर्ट से राहत मिल चुकी है.

भोपाल: मध्य प्रदेश के पन्ना जिले की पवई सीट से बीजेपी विधायक प्रहलाद लोधी की सदस्यता खत्म करने पर शुरू हुई राजनीति थमने का नाम नहीं ले रही है. दरअसल, इस मामले को लेकर राज्यपाल लालजी टंडन ने विधानसभा स्पीकर एनपी प्रजापति को चर्चा के लिए बुलाया था. वहीं, विधानसभा स्पीकर राजभवन नहीं पहुंचे. सूत्रों के मुताबिक, राजभवन की ओर से संपर्क के प्रयास किये गए. लेकिन, स्पीकर की व्यस्तता और बाहर होने का हवाला दिया गया. इसके बाद राज्यपाल ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर इस मामले की वस्तुस्थिति से अवगत करवाया और परामर्श भी मांगा.

वहीं, इस मामले पर बीजेपी विधायक दल के मुख्य सचेतक डॉ. नरोत्तम मिश्रा का कहना है कि संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के बीच मे संवादहीनता की स्थिति नही होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि संवैधानिक रूप से एमपी के चीफ है महामहिम राज्यपाल और विधानसभा अध्यक्ष को उनसे मिलने का प्रयास करना चाहिए. उन्होंने कहा कि हमारे नेता प्रतिपक्ष ने भी विधानसभा अध्यक्ष को मेरे सामने फोन लगाने की कोशिश की थी. जब बात हुई थी तो, काफी देर बाद उन्होंने कहा कि वह व्यस्त थे और अभी तक व्यस्त हैं. नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि सचिवालय ने जल्दबाजी में कोई निर्णय कर दिया है, तो उसे प्रतिष्ठा का प्रश्न नही बनाना चाहिए. उसमें सुधार करना चाहिए. 

नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि लोवर कोर्ट का आदेश मानने में विधानसभा अध्यक्ष को केवल दो घंटे लगे. वहीं, हाईकोर्ट का आदेश मानने में महीना भर लगता दिख रहा है. ऐसा नही होना चाहिए. निर्णय जो भी लेना है, वो लेना चाहिए. निर्णय इधर लें या उधर लें, वो उनका अधिकार है. गौरतलब है कि बीजेपी विधायक प्रहलाद लोधी को तहसीलदार से मारपीट और बलवे के मामले में भोपाल की विशेष अदालत ने दोषी ठहराया था. हालांकि, उन्हें हाईकोर्ट से राहत मिल चुकी है.