MP Board Exam 2026: ग्वालियर जिले में बोर्ड कॉपियों की जांच के दौरान अलग-अलग नजारे देखने को मिले. इस बार कई छात्रों ने पास होने के लिए कॉपी में अजब-गजब बातें लिखी हैं. यहां तक कि पैसे देने की बात भी लिखी, जिससे शिक्षक भी हैरान रह गए. आइए आज हम आपको बताते हैं, कि अलग-अलग कॉपियों में क्या-क्या लिखा है.
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Gwalior Board Paper News: मध्य प्रदेश में इस बार बोर्ड परीक्षाओं की कॉपियां जांचते समय शिक्षकों को अजब-गजब नजारे देखने को मिले. ग्वालियर के मूल्यांकन केंद्र पर 10वीं-12वीं की लाखों कॉपियों की जांच हुई, जहां कई छात्रों ने जवाबों के साथ ऐसी बातें लिख दीं कि शिक्षक भी हैरान रह गए. कोई पास होने की गुहार लगा रहा था, तो कोई अपनी मजबूरी बता रहा था. करीब 2 लाख 66 हजार से ज्यादा कॉपियां जांची गईं और इनमें से सौ से ज्यादा कॉपियों में छात्रों की अजीबोगरीब अपीलें की गई हैं. जो कि इस समय चर्चा की विषय बनी हुई हैं.
वहीं कुछ छात्रों ने तो पास कराने के लिए ऐसे-ऐसे कारनामे किए हैं, जिन्हें पढ़कर शिक्षक भी हंसी से लोटपोट हो गए. एक छात्र ने लिखा कि सर मुझे पास कर दीजिए, 'मैं आपकी शादी अपनी साली से करवा दूंगा.' वहीं एक छात्रा ने लिखा कि 'अगर वह फेल हो गई तो उसकी शादी टूट जाएगी.' इतना ही नहीं, एक ने तो ब्रेकअप को लेकर दर्द बयां किया है, उसने कहा कि 'सर प्लीज, पास कर दीजिए वरना ब्रेकअप हो जाएगा...' इन बातों से साफ दिखा कि कई छात्र पढ़ाई से ज्यादा उम्मीद भावनाओं के सहारे पास होने की लगा रहे थे.
बीमारियों का दिया हवाला
कई छात्राओं ने कॉपियों में लिखा कि उनकी शादी तय हो चुकी है और फेल होने पर घर में परेशानी हो सकती है. कुछ छात्रों ने माता-पिता की बीमारी का जिक्र करते हुए पास करने की अपील की. करीब 20 से ज्यादा बच्चों ने गंभीर बीमारियों का हवाला देकर पढ़ाई न कर पाने की बात लिखी. शिक्षक ने बताया कि ऐसे संदेश हर साल मिलते हैं, लेकिन इस बार संख्या कुछ ज्यादा रही.
कॉपी में क्या-क्या लिखा ?
सबसे हैरानी की बात यह है कि कुछ छात्रों ने कॉपियों में 500 रुपये तक रख दिए और पास कराने की बात लिखी. किसी ने मोबाइल नंबर लिखकर ऑनलाइन पैसे देने का ऑफर दिया तो किसी ने शायरी लिखकर शिक्षक को खुश करने की कोशिश की. हालांकि, शिक्षकों ने साफ कहा कि वे इन सब बातों को नजरअंदाज करते हैं और केवल उत्तर के आधार पर ही नंबर देते हैं. नियमों के मुताबिक ही कॉपियों का मूल्यांकन किया जाता है.
कई सालों से चला चलन
वहीं मूल्यांकन केंद्र के शिक्षकों का कहना है कि कॉपियों पर QR कोड होने की वजह से किसी को यह पता नहीं चलता कि कॉपी कहां जांची जा रही है. इसलिए छात्र सीधे शिक्षक तक पहुंच नहीं पाते और कॉपी में ही अपनी बात लिख देते हैं. कई सालों से यह चलन देखने को मिल रहा है. शिक्षक ने बताया कि पढ़ाई करने वाले बच्चे कभी ऐसी बातें नहीं लिखते, बल्कि जो कमजोर होते हैं, वही इस तरह के तरीके अपनाते हैं, ताकि किसी तरह पास हो जाएं.
तय समय में मूल्यांकन पूरा
अधिकारियों ने बताया कि इस साल जिले में करीब 49 हजार छात्र परीक्षा में शामिल हुए थे और कॉपियों की जांच तय समय में पूरी कर ली गई है. अब छात्रों को रिजल्ट का इंतजार है, जो 12 अप्रैल तक आने की संभावना है. शिक्षकों का कहना है कि वे बच्चों की भावनाओं को समझते जरूर हैं, लेकिन नंबर मेहनत के आधार पर ही दिए जाते हैं. उनका संदेश साफ है कि छात्र भावनात्मक बातें लिखने के बजाय पढ़ाई पर ध्यान दें, तभी भविष्य बेहतर बन सकता है.
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