झांसी की रानी को अंग्रेजों का दोस्त बताने वाले शिलालेख पर हिंदू सेना ने पोती कालिख

बीजेपी प्रवक्ता का कहना है कि झांसी की रानी लक्ष्मी बाई के इतिहास के बारे में जो गलत बातें लिखी गई हैं, वह ठीक नहीं है.

झांसी की रानी को अंग्रेजों का दोस्त बताने वाले शिलालेख पर हिंदू सेना ने पोती कालिख
1857 की क्रांति के दौरान झांसी की रानी लक्ष्मी बाई की शहादत ग्वालियर में ही हुई थी.

ग्वालियर: ग्वालियर में वीरांगना रानी लक्ष्मी बाई समाधि स्थल पर लगे शिलालेख पर बवाल मच गया है. लक्ष्मी बाई के जन्मदिवस के मौके पर हिन्दू सेना ने इस शिलालेख के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और गलत जानकारी वाले शिलालेख पर कालिख पोत दी. दरअसल, शिलालेख पर लिखे इतिहास पर हिंदू सेना ने जताई आपत्ति थी. शिलालेख में रानी लक्ष्मीबाई का जीवन परिचय लिखा है, जिसमें रानी लक्ष्मी बाई को अंग्रेजों का मित्र बताया गया है. साथ ही कई अन्य तथ्य भी भ्रामक हैं. पुलिस की मौजूदगी में हिन्दू सेना ने शिलालेख पर लिखी गलत जानकारियों पर कालिख पोत दी. हिन्दू सेना ने पुलिस को ज्ञापन सौंप कर कहा कि भ्रामक जानकारी वाले शिलालेख को नहीं हटाया गया तो, हिन्दू सेना इसे खुद तोड़ देगी.

वहीं, पुलिस ने कहा कि इस घटना की वीडियोग्राफी कराई गई है, ज्ञापन अधिकारियों तक पहुंचाएंगे. कालिख मामले पर वीडियो के आधार पर जांच होगी. इस बारे में मध्य प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री डॉ. गोविंद सिंह का कहना है कि जिन लोगों ने भी यह कृत किया है, वह कुत्सित मानसिकता रखने वाले लोग हैं. भारत के सांप्रदायिक सद्भाव को खराब करना चाहते हैं. ऐसे लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए. 

बीजेपी प्रवक्ता का कहना है कि झांसी की रानी लक्ष्मी बाई के इतिहास के बारे में जो गलत बातें लिखी गई हैं, वह ठीक नहीं है. उस शिलालेख को प्रशासन को जल्द से जल्द वहां से हटाना चाहिए, क्योंकि पूरा देश जानता है कि झांसी की रानी अंग्रेजों के खिलाफ लड़ते लड़ते वीरगति को प्राप्त हुई थीं. उनका कहना है कि देश में कुछ लोग ऐसे भी हुए, जिन्होंने भारत के इतिहास को बदनाम करने के लिए कुछ ऐसे तथ्य डाल दिए जो कि सरासर गलत हैं. हो सकता है जिस अधिकारी ने यह शिलालेख तैयार कराया हो उसने भ्रमित करने वाले वाक्यों को उस किताब से पढ़ा हो.

दरअसल, 1857 की क्रांति के दौरान झांसी की रानी लक्ष्मी बाई की शहादत ग्वालियर में ही हुई थी. जिस जगह उनकी शहादत हुई, उसी जगह उनका समाधि स्थल भी बनाया गया है. कुछ सालों पहले इस समाधि स्थल का भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा रिनोवेशन का काम किया गया है. उसी कार्य के तहत कुछ अन्य शिलालेख भी लगाए गए हैं, यह उन्हीं शिलालेखों में से एक शिलालेख है.