दुनिया भर में हो रहा मानव तस्करी का कारोबार, भारत के ये राज्य भी शामिल

2019 के आंकड़ो की मानें तो विश्वभर में मानव तस्करी से लगभग 25 मिलियन वयस्क तथा बच्चे पीड़ित हैं. लगभग 60% मामलों में पीड़ितों को विदेश ले जाने के बजाय देश के अंदर ही उनकी तस्करी की जाती है.जिनमें छत्तीसगढ़ भी शामिल है.

दुनिया भर में हो रहा मानव तस्करी का कारोबार, भारत के ये राज्य भी शामिल
सांकेतिक तस्वीर

रायपुर: ह्यूमन ट्रैफिकिंग या मानव तस्करी का जाल दुनिया भर में फैला हुआ है. ये एक ऐसा अपराध है, जिसमें शोषण के लिए महिलाओं, बच्चों आदि को खरीदा बेचा जाता है. उसके बाद उन्हें किसी अन्य राज्य या देश भेज दिया जाता है. 

बच्चों को बाल मजदूरी करने व महिलाओं को देह व्यापार के लिए बेच दिया जाता है. ज्यादातर मामलों में बहला-फुसलाकर इन लोगों का सौदा किया जाता है. जबकि कई बार खुद परिजन पैसों की तंगी या किसी मजबूरी के चलते अपने बच्चे को बेच देते हैं. 

इसकी रोकथाम के लिए साल 1997 में संयुक्‍त राष्‍ट्र मादक पदार्थ एवं अपराध कार्यालय (United Nations Office of Drugs and Crime)की स्थापना की गई थी. UNODC मानव तस्‍करी जैसे अपराधों की रोकथाम और दंड न्‍याय संबंधी कार्य करता है.

भारत के इन राज्यों में भी धड़ल्ले से होती है ह्यूमन ट्रैफिकिंग
संयुक्‍त राष्‍ट्र मादक पदार्थ एवं अपराध कार्यालय द्वारा जारी 2019 के आंकड़ो की मानें तो विश्वभर में मानव तस्करी से लगभग 25 मिलियन वयस्क तथा बच्चे पीड़ित हैं. लगभग 60% मामलों में पीड़ितों को विदेश ले जाने के बजाय देश के अंदर ही उनकी तस्करी की जाती है.भारत में सबसे अधिक मानव तस्करी पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, झारखंड और असम में होती हैं.

छत्तीसगढ़ में मानव तस्करी विशेष रूप से जनजातीय क्षेत्रों में प्रचलित रही है. छत्तीसगढ़ का उत्तरी क्षेत्र जिसमें सर्गुजा, कोरबा, जशपुर, कोरिया और रायगढ़ जिला शामिल हैं. यदि हम गुमशुदा बच्चों के आंकड़ों की बात करें तो छत्तीसगढ़ के लगभग सभी जिलों में तस्करी का कारोबार होता है. 

छत्तीसगढ़ के इन जिलों से होती है सबसे अधिक तस्करी
प्रदेश के सर्गुजा, कोरबा, जशपुर, कोरिया और रायगढ़ जिले तस्करी की चपेट में सबसे अधिक हैं. जिनमें से जशपुर और सरगुजा से अधिकांश पीड़ित झारखंड के माध्यम से दिल्ली और देश के उत्तरी हिस्सों में भेजे जाते हैं.

 

2017 की रिपोर्ट के मुताबिक छत्तीसगढ़ में मजबूर श्रम के 191 और यौन शोषण व वेश्यावृत्ति के 41 मामले दर्ज हुए थे. जबकि एक मामला जबरन शादी और 31 मामले घरेलू नौकरी (House Servant)के थे.

इस रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ में कुल 269 लोग मानव तस्करी का शिकार हुए थे. जिनमें 60 लड़के और 78 लड़कियां 18 साल से कम उम्र के थे. वहीं 77 पुरुष और 54 महिलाएं ऐसे थे जिनकी उम्र 18 साल से अधिक थी.

छत्तीसगढ़ में साल 2017 में  6649 महिलाओं की गुमशुदगी दर्ज की गई थी. वहीं  2018 में ये आंकड़ा  7383 हुआ और 2019 तक 9412 पहुंच गया.

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बता दें कि 14 अक्टूबर को भी सरगुजा में पुलिस ने 25 लड़कियों को चेन्नई की बस में ले जाते हुए पकड़ा है. लड़कियों के पास कोई वैध दस्तावेज नहीं मिले हैं. पुलिस इसे मानव तस्करी का मामला मानते हुए ही जांच कर रही है.

संयुक्‍त राष्‍ट्र मादक पदार्थ एवं अपराध कार्यालय की मानव तस्करी पर वैश्विक रिपोर्ट (Global Report on Trafficking in Persons) के मुताबिक राष्ट्र अब इस अपराध को लेकर जागरूक हो रहा है. पीड़ितों की पहचान कर अधिक-से-अधिक तस्करों को सजा भी दी जा रही है.

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