अनपढ़ ग्रामीण ने बनाई अपनी पोकलेन मशीन, ना बिजली ना डीज़ल की ज़रूरत
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अनपढ़ ग्रामीण ने बनाई अपनी पोकलेन मशीन, ना बिजली ना डीज़ल की ज़रूरत

कहते हैं हुनर किसी पहचान या पैसे का मोहताज नहीं होता, इसे सही साबित कर दिखाया है पखांजूर क्षेत्र के नक्सल प्रभावित गांव के एक अनपढ़ ग्रामीण ने। 

 

अनपढ़ ग्रामीण ने बनाई अपनी पोकलेन मशीन, ना बिजली ना डीज़ल की ज़रूरत

पखांजूर: कहते हैं हुनर किसी पहचान या पैसे का मोहताज नहीं होता, इसे सही साबित कर दिखाया है पखांजूर क्षेत्र के नक्सल प्रभावित गांव PV 127 के एक अनपढ़ व्यक्ति श्रीपति राय ने।

श्रीपति गरीब परिवार से हैं एवं अशिक्षित हैं मगर जज़्बा बेहद ऊंचा, वो देश के लिए कुछ करना चाहते हैं और इसी जज़्बे और चाहत से उन्होंने एक पोकलेन मॉडल बना डाला जो किसी बैटरी, बिजली, डीज़ल या पेट्रोल के बिना ही चलती है।

ये मशीन मिटटी खोद कर उठाकर फेंकने का काम बखूबी करती है। इसके अलावा श्रीपति ने एक वाद्ययंत्र भी बनाया है जिसकी मदद से श्रीपति गाना बजाना कर लोगों का मनोरंजन भी करते हैं।

श्रीपति की इस पोकलेन मशीन के ज़रिए बिना किसी ऊर्जा के लोग अपना काम कम खर्च में करवा पाएंगे।

दरअसल श्रीपति की ये पोकलेन मशीन पानी और हवा के दबाव पर काम करती है। 

अब श्रीपति को अपनी इस मशीम को विकसित करने के लिए सरकार से मदद का इंतज़ार है। 

 

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