भोपाल में नर्मदा, गाय को लेकर कंप्यूटर बाबा और संत अखिलेश्वरानंद की आपस में भिड़ंत

भोपाल में एक निजी समाचार चैनल के शनिवार को हो रहे कार्यक्रम 'बाबा से डर लगता है' में यह घटना हुई....

भोपाल में नर्मदा, गाय को लेकर कंप्यूटर बाबा और संत अखिलेश्वरानंद की आपस में भिड़ंत
शिवराज से नाराज चल रहे कंप्यूटर बाबा (फाइल फोटो)

भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शनिवार को नर्मदा नदी की स्थिति और गाय को लेकर साधु-संत आपस में भिड़ गए... कंप्यूटर बाबा जहां प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर निशाना साधते रहे तो दूसरी ओर गौ संवर्धन बोर्ड के प्रमुख स्वामी अखिलेश्वरानंद सरकार का बचाव करने से नहीं चूके... 

राजधानी के एक होटल में निजी समाचार चैनल ने शनिवार को 'चुनाव मंच' का आयोजन किया... इस आयोजन की शुरुआत 'बाबा से डर लगता है' कार्यक्रम से हुई... इस मौके पर राज्यमंत्री पद से इस्तीफा दे चुके कंप्यूटर बाबा ने नर्मदा की दुर्दशा और बेहाल गायों की हालत का मसला उठाते हुए मुख्यमंत्री चौहान पर झूठी घोषणाएं करने का आरोप लगाया.... 

कंप्यूटर बाबा के आरोपों का अखिलेश्वरानंद ने जवाब दिया और कंप्यूटर बाबा के ही संत होने पर सवाल उठा दिए.... साथ ही दावा किया कि शिवराज के काल में नर्मदा और गायों की हालत में सुधार आया है... इस दौरान कंप्यूटर बाबा ने आरोप लगाया कि शिवराज ने नर्मदा में होने वाले अवैध खनन को रोकने का कोई प्रयास नहीं किया है, वह सिर्फ झूठे वादे करते रहे, जब शिवराज ने नर्मदा के लिए काम नहीं किया तो उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया.............

कंप्यूटर बाबा के आरोपों का अखिलेश्वरानंद ने जवाब दिया... उन्होंने कहा कि शिवराज एक संवेदनशील मुख्यमंत्री है, उन्होंने नर्मदा नदी के लिए काफी काम किया है.. अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए कदम उठाए हैं, वहीं गायों की हालत सुधारने के लिए गौ अभ्यारण्य बनाए गए.. गौ संवर्धन का बजट बढ़ाया गया है.. 

इस मौके पर मौजूद स्वामी निमियानंद ने दो साधुओं के बीच हो रही बहस पर सवाल उठाए और कहा कि इस बहस से राज्य की जनता के बीच अच्छा संदेश नहीं जाएगा... साधुओं को इससे बचना चाहिए....

उन्होंने आगे कहा कि राज्य में सरकार नर्मदा, गाय, मठ-मंदिर की बात करती है, मगर दुर्भाग्य है कि राज्य में सबसे ज्यादा मंदिर इसी सरकार के काल में टूटे हैं, नर्मदा की दुर्गति हुई है, गायों के लिए उपयोग में लाए जाने वाले पानी और बिजली का बिल लगता है... इतना ही नहीं, मठ-मंदिरों के संचालकों को पट्टे नहीं दिए जाते हैं..

(इनपुट आईएएनएस से)