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कभी एक बोरिंग के भरोसे था पूरा गांव, वह भी सूखा तो चंदा इकट्ठा करके बना डाला स्टॉप डैम

यहां गांव के नलकूप और हेण्डपम्प बंद पड़ गए थे. पानी की इतनी विकराल समस्या को देखते हुए यहां के ग्रामीणों ने ही बीड़ा उठाया और बिना सरकार की मदद लिए नदी के गहरीकरण में लग गए.

कभी एक बोरिंग के भरोसे था पूरा गांव, वह भी सूखा तो चंदा इकट्ठा करके बना डाला स्टॉप डैम
ग्रामीणों ने 20 दिन में बना डाला डैम (फोटो साभारः ANI)

इंदौरः मध्य प्रदेश के इंदौर से सटे कनाड़िया गांव के ग्रामीणों ने कुछ ऐसा कर दिखाया है, जिसकी हर तरफ तारीफ हो रही है. दरअसल, यह गांव पानी के लिए तरस रहा था पूरे गांव के लोगों ने मेहनत कर नदी को इतना गहरा कर दिया कि अब पूरे साल इस गांव में पानी की कमी नहीं होगी. खास बात यह है कि इन ग्रामीणों ने सरकार से कुछ मदद नहीं ली है. वहीं निगम ने मदद के नाम पर सिर्फ एक पोकलेन और एक जेसीबी मशीन दी थी.

बता दें कनाड़िया गांव इंदौर से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित है, लेकिन इसके बाद भी गांव में पानी की भारी समस्या थी. एक समय था जब यहां के ग्रामीण पानी के लिए तरस रहे थे और पूरे गांव का जलस्तर काफी गिर गया था, यहां गांव के नलकूप और हेण्डपम्प बंद पड़ गए थे. पानी की इतनी विकराल समस्या को देखते हुए यहां के ग्रामीणों ने ही बीड़ा उठाया और बिना सरकार की मदद लिए नदी के गहरीकरण में लग गए.

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सभी ग्रामीणों ने मिलकर महज 20 दिनों में इस नदी को जीवित कर दिया और इस नदी पर एक डैम का निर्माण कर दिया. वहीं नदी को 15 फिट तक गहरी कर दी. जो अब पहली बारिश से ही 10 फिट तक भरा गई है वहीं भू जलस्तर भी बढ़ गया है. ग्रामीणों की मेहनत इतनी रंग लाई की यहां के हेंडपम्प और नलकूप भी जीवित हो उठे हैं. यह नदी कंकावती नदी है जिसका समागम क्षिप्रा में होता है. एक आज से कुछ दिन पूर्व यह नदी सुखी पड़ी थी. पानी की किल्लत के चलते इन ग्रामीणों ने कुछ कर गुजरने की ठानी और लग गए काम पर.

आठ हजार की आबादी वाले इस गांव में सब ने इस काम में सहयोग दिया और तपती दोपहर में भी इस काम को अंजाम देने में लगे रहे. इन ग्रामीणों के अनुसार हर घर से चंदा लिया गया और लोग जुड़ते चले गए और कारवां बनता गया. लोगों ने अपनी हैसियत के मुताबिक इस नेक काम मे मदद की और चंदे के रूप में 20 लाख रुपये इक्कठे हुए और बिना सरकार की मदद के इस जल संवर्धन योजना को अंजाम दे दिया.

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बहरहाल, इस गांव में पहली बारिश से इतना पानी इकट्ठा हो गया है कि पूरे साल अब इन ग्रामीणों को यहां पानी की समस्या नहीं होगी. वहीं इन ग्रामीणों ने नदी के दोनों तरफ हरियाली का विशेष ध्यान रखा है जहां नीम, पीपल और कई पेड़ लगाए हैं. जिससे पर्यावरण भी अच्छा रहेगा. इन ग्रामीणों ने जो काम कर दिखाया है वह सच में तारीफ के काबिल है.