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Childs Body Exhumed from Grave-मध्यप्रदेश के इंदौर से एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां दो साल की मासूम बच्ची की मौत के बाद इलाज में लापरवाही के आरोप लगे हैं. परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है, वहीं शव को कब्र से निकालकर पोस्टमार्टम भी कराया गया है. परिजनों का आरोप है कि बच्ची को क्लीनिक में 5 बोतलें चढ़ाई गईं थी और कहा गया था कि ठीक हो जाएगी. लेकिन बच्ची की हालत बिगड़ती चली गई और उसकी मौत हो गई.
27 मई को बिगड़ी थी तबीयत
मामला इंदौर के भंवरकुआं थाना क्षेत्र का है. पालदा कॉलोनी निवासी निशा यादव की दो वर्षीय बेटी काशवी यादव की तबीयत 27 मई को उल्टी-दस्त की शिकायत के चलते बिगड़ गई थी. परिजन उसे एक निजी हॉस्पिटल में इलाज के लिए लेकर पहुंचे, जहां दिनभर उपचार के बाद रात को बच्ची को डिस्चार्ज कर दिया गया.
परिजनों को बिना बताए दफनाया
लेकिन देर रात में ही बच्ची की तबीयत फिर से बिगड़ गई, जिसके बाद परिजन 28 मई को उसे दूसरे निजी अस्पताल लेकर पहुंचे. हालत गंभीर होने पर वहां से बच्ची को एमवाय हॉस्पिटल रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान देर रात उसकी मौत हो गई. आरोप है कि 29 मई को परिजनों ने बिना पुलिस को सूचना दिए बच्ची का अंतिम संस्कार कर दिया. इसके बाद उसी दिन शाम को परिजन भंवरकुआं थाने पहुंचे और पहले अस्पताल में इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई.
कब्र से निकाला गया शव
पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. वहीं एसडीएम की अनुमति के बाद 2 जून को बच्ची के शव का उत्खनन कर पोस्टमार्टम कराया गया. डॉक्टरों की पांच सदस्यीय टीम द्वारा पोस्टमार्टम किया गया है, जिसमें विसरा समेत अन्य सैंपल सुरक्षित रखे गए हैं. अब जांच के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि बच्ची को दिए गए इलाज और दवाओं में कोई लापरवाही तो नहीं हुई. फिलहाल पोस्टमार्टम और रासायनिक जांच की रिपोर्ट के बाद ही मौत के असली कारणों का खुलासा हो पाएगा.
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