छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में कहीं बीजेपी की हार का कारण जोगी, मायावती तो नहीं ?

शुरुआत में माना जा रहा था कि अजीत जोगी की पार्टी कांग्रेस के वोट बैंक को कम कर सकती है, लेकिन रिजल्ट आने पर यह गलत साबित हो गया, क्योंकि कांग्रेस का वोट बैंक घटने की जगह 2 प्रतिशत बढ़ गया.

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में कहीं बीजेपी की हार का कारण जोगी, मायावती तो नहीं ?
फाइल फोटो

रायपुरः पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजों में सबसे बड़ा झटका भाजपा को लगा है, जहां कांग्रेस ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भाजपा सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया है. लेकिन, इन सब में भी भाजपा को सबसे बुरी हार का सामना करना पड़ा छत्तीसगढ़ में, जहां कांग्रेस ने भाजपा को 15 सीटों पर ही समेट दिया और खुद 68 सीटों पर कब्जा जमाया. वहीं विधानसभा चुनाव नतीजों के विश्लेषणात्मक आकड़ों पर गौर किया जाए तो छत्तीसगढ़ में भाजपा की हार का कारण कांग्रेस के साथ ही जोगी को भी बताया जा रहा है. 

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हाल ही में हुए एक चुनावी विश्लेषण में साने आया है कि 'मायावती और अजीत जोगी की पार्टी के गठबंधन से जितना कांग्रेस को नुकसान नहीं हुआ उससे कहीं ज्यादा भाजपा को हुआ है और भाजपा और कांग्रेस के बीच जीत के अंतर से यह साबित भी हुआ है कि छत्तीसगढ़ में भाजपा की हार का सबसे बड़ा कारण JCCJ और BSP का गठबंधन रहा है. बता दें बीजेपी को 2018 के विधानसभा चुनाव में करीब 50 फीसदी सीटों का नुकसान हुआ है, जिसके चलते भाजपा 49 से घटकर 15 सीटों पर आ पहुंची. वहीं कांग्रेस को जोगी के पार्टी से अलग होने का फायदा हुआ और कांग्रेस ने 68 सीटों पर जीत हासिल की.

बता दें कांग्रेस को करीब 62 प्रतिशत ऐसी सीटों पर जीत हासिल हुई है जहां 2013 के विधानसभा चुनाव में अजीत जोगी को हार का सामना करना पड़ा था. ऐसे में साफ जाहिर है कि कहीं न कहीं कांग्रेस से जोगी के अलग होने से भाजपा के वोट बैंक पर काफी असर हुआ है. बता दें भाजपा के कब्जे वाली 28 सीटों बीजेपी के वोटर्स JCCJ के साथ बंट गए, जबकि कांग्रेस के वोट बैंक पर जोगी के अलग होने का कोई प्रभाव नहीं पड़ा. जिसके चलते 28 में से 17 सीटों पर कांग्रेस ने कब्जा किया तो भाजपा को सिर्फ 11 सीटें ही मिलीं. वहीं जोगी, मायावती के गठबंधन ने इस विधानसभा चुनाव में 6 सीटें हासिल कीं.

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जोगी के कांग्रेस से अलग होने पर शुरुआत में माना जा रहा था कि अजीत जोगी की पार्टी कांग्रेस के वोट बैंक को कम कर सकती है, लेकिन रिजल्ट आने पर यह गलत साबित हो गया, क्योंकि कांग्रेस का वोट बैंक घटने की जगह 2 प्रतिशत बढ़ गया और भाजपा को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा. 2003 से लेकर अभी तक के विधानसभा चुनाव पर नजर डाली जाए तो भाजपा के वोट बैंक का स्तर अब तक में सबसे नीचे 2018 के विधानसभा चुनाव में गया है. 2003 में बीजेपी को 39.26 प्रतिशत वोट मिले तो 2008 में यह आंकड़ा बढ़कर 40.33 प्रतिशत हो गया. 2008 के बाद 2013 में इस आंकड़े में और भी इजाफा हुआ और भाजपा के हिस्से 41.04 वोट आए, जबकि 2018 में बीजेपी के वोटबैंक का स्तर गिरा और 32.87 पर जा अटका