जबलपुर की बेटी सुरभि ने दर्ज कराया इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम, 14 साल की छोटी उम्र में किया बड़ा कारनामा

आज के इस दौर में जहां लोग अपनी भागादौड़ भरी दिनचर्या में इसका पाठ करने के लिए आसानी से वक्त नहीं निकाल पाते हैं, वहीं जबलपुर की बेटी सुरभि ने श्रीमद्भागवत गीता को महज 6 घंटे 17 मिनिट में अर्थ समेत व्याख्या कर सभी को हैरत में डाल दिय है.

जबलपुर की बेटी सुरभि ने दर्ज कराया इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम, 14 साल की छोटी उम्र में किया बड़ा कारनामा

कर्ण मिश्रा/जबलपुर: गीता में कहा गया है कि मनुष्य जैसा कर्म करता है वैसा ही फल पाता है. यही वजह है कि संस्कारधानी जबलपुर की बेटी सुरभि मुले ने अपने कर्म और मेहनत के बल पर आज एक ऐसा कीर्तिमान बना दिया है जिसे तोड़ना आसान नहीं होगा,

मनुष्य के जीवन का सार श्रीमद्भागवत गीता को माना जाता है.आज के इस दौर में जहां लोग अपनी भागादौड़ भरी दिनचर्या में इसका पाठ करने के लिए आसानी से वक्त नहीं निकाल पाते हैं, वहीं जबलपुर की बेटी सुरभि ने श्रीमद्भागवत गीता को महज 6 घंटे 17 मिनिट में अर्थ समेत व्याख्या कर सभी को हैरत में डाल दिय है.

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सुबह 8 बजकर 15 मिनट से सुरभि ने जजेज के सामने श्रीमदभागवत गीता का पाठ अर्थ सहित सुनाना शुरू किया था, जिसे 6 घंटे 17 मिनिट में पूरा कर दिया. खास बात ये है कि सुरभि को छठवें अध्याय के बाद ब्रेक लेना था, पर वो रुकी नहीं और लगातार गीता का पाठ करते हुए आठवें अध्याय तक पहुंच गई. जिसके बाद चंद मिनिट का ब्रेक लेकर सुरभि अपनी लगन के साथ फिर आगे बढ़ गयी और जल्द 18 अध्याय पर पहुंच गई.

14 साल की छोटी उम्र में जब सुरभि ने 700 श्लोकों का कंठस्थ पाठ करते हुए व्याख्या की तो निर्णायक भी हैरान हो गए. ऐसे में उसकी लगन और आस्था के चलते सुरभि मुले ने श्रीमदभगवत गीता का निरंतर अर्थ सहित पाठ करके इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कर लिया है.सुरभि मुले दसवीं कक्षा की छात्रा हैं और आठ साल की उम्र से अपनी दादी विजया मुले से भगवत गीता को अर्थ सहित पढ़ना सीख रही हैं. 

सुरभि के कीर्तिमान को जज करने के लिए नागपुर से इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड की डॉ. पुनीता धोटे निरीक्षण के लिए मौजूद रही. साथ ही दिल्ली से भी लगातार ऑनलाइन निगाह रखी जा रही थी. सुरभि की सफलता के बाद पूरे परिवार में खुशी की लहर है.

दादी और पिता को दिया श्रेय
सुरभि कहती हैं कि उनकी इस सफलता का श्रेय उनकी दादी और उनके पिता को जाता है. अब सुरभि इच्छा है कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर श्रीमद्भागवत गीता का ऐसे ही वाचन करे. ऐसे में कीर्तिमान को विश्वकीर्ति पटल पर अंग्रेजी में गीता की व्याख्यान करना भी उनका भविष्य का लक्ष्य है. युवाओं को संदेश देते हुए सुरभि ने कहा कि आज आध्यात्म की सबसे ज्यादा जरूरत युवाओं को है. ऐसे में जरूरत है कि आधुनिकता की आज की दौड़ के बीच आध्यात्म को लेकर भी वह साथ चलें.

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