जबलपुर हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, फर्जी तरीके से 94 छात्रों का एडमिशन कैंसिल

मध्य प्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेजों में MBBS की सीटों पर साल 2017 में हुए एडमिशन को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है. हाईकोर्ट ने गलत तरीके से एडमिशन लेने वाले 94 छात्रों का एडमिशन कैंसिल कर दिया है.

जबलपुर हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, फर्जी तरीके से 94 छात्रों का एडमिशन कैंसिल
2017 में हुए मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन में धांधली. (फाइल फोटो)

जबलपुर: मध्य प्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेजों में MBBS की सीटों पर साल 2017 में हुए एडमिशन को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है. हाईकोर्ट ने गलत तरीके से एडमिशन लेने वाले 94 छात्रों का एडमिशन कैंसिल कर दिया है. छात्रों की ओर से दायर की गई याचिका पर हाईकोर्ट ने सरकार को इस पूरे मामले की जांच करने के आदेश दिए थे. हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा गया कि प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों ने नियमों के खिलाफ मॉप-अप राउंड में छात्रों को एडमिशन दिया है, और ये वह छात्र हैं जो मध्यप्रदेश के मूल निवासी नहीं है. 

NEET के नियमों का उल्लंघन
NEET परीक्षा नियमों के मुताबिक मध्यप्रदेश में केवल उन्हीं छात्रों को निजी मेडिकल कॉलेजों में दाखिला देना है, जो मध्यप्रदेश के मूल निवासी हैं. लेकिन, प्रदेश के प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों ने NEET के नियमों का उल्लंघन करते हुए और मॉप-अप राउंड के जरिए मोटी रकम लेकर दूसरे राज्यों के छात्रों को अपने मेडिकल कॉलेजों में दाखिला दिया. प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों के इस गोरखधंधे के खिलाफ जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी. सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि 94 छात्र ऐसे हैं जिन्हें फर्जी तरीके से मेडिकल कॉलेजों में दाखिला दिया गया है. लिहाजा उनका उनका एडमिशन कैंसिल कर दिया गया.

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NRI कोटे के तहत 107 छात्रों का एडमिशन भी कैंसिल
इससे पहले प्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेजों में NRI कोटे के तहत हुए एडमिशन का मामला भी जबलपुर हाईकोर्ट पहुंचा था. दरअसल 28 नवंबर को डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन ने NRI कोटे के तहत हुए फर्जी दाखिलों की जांच पड़ताल की. जांच में पाया गया कि 114 में से 107 NRI छात्रों का दाखिला फर्जी तरीके से किया गया है. डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन ने सभी 107 छात्रों के एडमिशन निरस्त कर दिए थे, और निजी कॉलेजों को निर्देश दिए थे कि इन तमाम छात्रों की हॉस्टल और ट्यूशन फीस वापस करें. सभी छात्रों को तत्काल बाहर कर दिया जाए. लेकिन, DME के आदेश के बावजूद सभी मेडिकल कॉलेजों में फर्जी छात्र पढ़ाई कर रहे हैं. इस मुद्दे को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी.