CG: सालों से खराब है स्कूल का हैंडपंप, गंदे कुएं का पानी पीने को मजबूर हैं बच्चे

शासकीय प्राथमिक शाला भट्ठा में लगभग 70 बच्चे पढ़ते है. वहीं स्कूल के सामने आंगनबाड़ी भी है, वहां भी पीने के पानी के लिए डभरी और गंदे कुएं का उपयोग किया जाता है. बच्चे अपनी प्यास मिटाने के लिए हर रोज स्कूल से पांच सौ मीटर दूर जाते है. 

CG: सालों से खराब है स्कूल का हैंडपंप, गंदे कुएं का पानी पीने को मजबूर हैं बच्चे
स्कूल प्रशासन का कहना है कि इसको लेकर कई बार शिकायत की लेकिन कार्रवाई नहीं हुई.

जशपुर: आदिवासी क्षेत्रों (Tribal Areas) में सरकार विकास के तमाम दावे तो करती है, लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है. ताज़ा मामला जशपुर (Jashpur) जिले के बगीचा विकासखंड के उकई ग्राम पंचायत का है. यहां पीने के पानी (Drinking water) का भीषण संकट (Severe Crisis) है. पाठ क्षेत्रों के स्कूलों में बच्चे पीने के लिए साफ पानी को तरस रहे हैं. हैंडपंप पिछले कई सालों से ख़राब होने की वजह से स्कूली बच्चे खेत में बने डभरी और गंदे कुएं का पानी पीने को मजबूर हैं.

शासकीय प्राथमिक शाला भट्ठा में लगभग 70 बच्चे पढ़ते है. वहीं स्कूल के सामने आंगनबाड़ी भी है, वहां भी पीने के पानी के लिए डभरी और गंदे कुएं का उपयोग किया जाता है. बच्चे अपनी प्यास मिटाने के लिए हर रोज स्कूल से पांच सौ मीटर दूर जाते है. 

गांव के लोगों और शिक्षक की मानें तो पानी की इस समस्या के बारे में कई बार अधिकारियों को समस्या के समाधान की मांग की है. लेकिन आज तक कोई इस तरफ ध्यान नहीं दिया है. अब प्यास मिटाने के लिए बच्चे डभरी और गंदे कुएं का उपयोग कर रहे है और बीमार हो रहे हैं. 

इस समस्या को लेकर जब जिला शिक्षा अधिकारी से बात की गई तो उन्होंने कहा की जल्द बच्चों को पीने का पानी व्यवस्था की जाएगी. इस स्कूल में 70 बच्चो के बीच मात्र एक शिक्षक है. इस बारे में जब अधिकारियों से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हाल ही में हुए शिक्षकों की ट्रांसफर से व्यवस्था गड़बड़ा गई है. जल्द सब ठीक हो जाएगा.

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वहीं, जशपुर विधायक विनय भगत का कहना है कि इसके बारे में अब जानकारी मिली है. उन्होंने कहा कि आज के समय में अगर बच्चे डभरी और गंदे कुएं का पानी पी रहे हैं तो यह दुर्भाग्य की बात है. उन्होंने कहा कि वह जल्द ही उस गांव में जाकर लोगों से बात करेंगे और समस्या का समाधान कराएंगे.