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खुद को 'महाराज' कहलवाना पसंद नहीं करते ज्योतिरादित्य सिंधिया, कुछ ऐसा है उनका सियासी सफर

मध्यप्रदेश चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंके हुए हैं. 

खुद को 'महाराज' कहलवाना पसंद नहीं करते ज्योतिरादित्य सिंधिया, कुछ ऐसा है उनका सियासी सफर
सिंधिया को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का करीबी माना जाता है...(फोटो साभार: Facebook)

भोपाल: मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया चुनाव में पूरी ताकत झोंके हुए हैं. उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का बहुत करीबी माना जाता है. ग्वालियर राजघराने से ताल्लुक रखने वाले सिंधिया स्टेनफ़ोर्ड हावर्ड यूनिवर्सिटी से एमबीए हैं. 30 सितंबर 2001 को एक विमान हादसे में पिता माधवराव सिंधिया की मौत के बाद उनकी ज़िन्दगी का रुख बदल गया. तेजी से सियासी पैंतरे सीखे. महल की विरासत के साथ अपने पिता की राजनैतिक विरासत को बखूबी संभाला. सिंधिया ने 2014 के लोकसभा चुनाव में नामांकन के दौरान अपनी संपत्ति 32 करोड़ 64 लाख रुपए बताई थी. आइए एक नजर उनके अब तक के सियासी सफर पर डाल लेते हैं: 

ज्योतिरादित्य सिंधिया का जनम 1 जनवरी 1971 को मुंबई में हुआ. उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई मुंबई के ही मशहूर कैंपियन स्कूल में की. आगे की पढ़ाई के लिए दून स्कूल में दाखिला लिया. उच्च शिक्षा के लिए माधवराव सिंधिया उन्हें कैम्ब्रिज भेजना चाहते थे, लेकिन ज्योतिरादित्य को अमेरिका पसंद आया और हावर्ड और स्टेनफ़ोर्ड से एमबीए किया. साल 2001 में ज्योतिरादित्य पिता की विरासत संभालने के लिए तत्काल तैयार नहीं थे, लेकिन पिता के असामयिक निधन के कारण उन्हे राजनीति में आना पड़ा.

2002 में पहली बार सांसद बने
पिता माधवराव के निधन के बाद गुना लोकसभा सीट पर उपचुनाव हुआ. इस उपचुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पर्चा भरा और जीत हासिल कर अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की. फिर 2004 के लोकसभा चुनाव में इस सीट से फिर जीत दर्ज की. 2007 में उन्हें मनमोहन मंत्रिमंडल में जगह दी गई. 2009 का चुनाव भी उन्होंने गुना सीट से जीता. उन्हें फिर से मंत्री पद दिया गया.  

मंत्री बनने के बाद भी नहीं लगाई लाल बत्ती
सिंधिया ने मंत्री बनने के बाद भी अपनी गाड़ी पर लाल बत्ती भी नहीं लगाई. उन्हें खुद को महाराज कहलाना भी पसंद नहीं है. दरअसल, ग्वालियर-चंबल के कई इलाकों में लोग उन्हें महाराज के नाम से पुकारते हैं. वह कई मंचों पर इस बात को दोहरा चुके हैं. उनके बारे में कहा जाता है कि वह एसी गाड़ी में नहीं चलते. आम आदमी से घुलने-मिलने के उनके सहज अंदाज के चलते उनकी लोकप्रियता अपने पिता के समान है.

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महंगी कारों के शौकीन, क्रिकेट में भी खास रुचि
ज्योतिरादित्य सिंधिया महंगी कारों का शौक ही नहीं रखते, बल्कि रफ्तार के भी शौकीन हैं. 10-12 साल की उम्र से ही ज्योतिरादित्य को कार रेसिंग का भी शौक लगा. वो तेज कार चलाते थे, लेकिन उन्हें इस बात का भी ख्याल रहता था कि उनकी इस आदत का पिता को पता न चले. पिता की तरह क्रिकेट में भी उनकी रुचि है. वह मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं.