1978 में बीमारी की वजह से कैलाश जोशी ने छोड़ी थी CM की कुर्सी, फिर भी 39 साल बाद तक रहे सक्रिय

कैलाश जोशी 2001 में राज्यसभा सांसद चुने गए. इस दौरान उन्हें छत्तीसगढ़ में पार्टी का प्रदेश प्रभारी बनाया गया था. 

1978 में बीमारी की वजह से कैलाश जोशी ने छोड़ी थी CM की कुर्सी, फिर भी 39 साल बाद तक रहे सक्रिय
कैलाश जोशी 2004 और 2009 में भोपाल से लोकसभा सांसद रहे.

भोपाल: एमपी के पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी के निधन के बाद मध्य प्रदेश में शोक की लहर छा गई है. कैलाश जोशी ने 91 वर्ष की उम्र में आखिरी सांस ली. पिछले कुछ दिनों से उनकी तबियत ज्यादा खराब हो गई थी और उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया था. 24 नवंबर को सुबह 11 बजकर 24 मिनट पर उन्होंने भोपाल के निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली. जोशी को राजनीति का संत कहा जाता था. ये उपाधि उन्हें तब मिली, जब उनका राजनैतिक जीवन कामयाबी की बुलंदियां छू रहा था. राजनीति की स्याह गलियों में जोशी आखिरी वक्त तक बेदाग रहे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया कि निधन की खबर से पीड़ा हुई. वे निष्ठावान कार्यकर्ता और प्रभावशाली जनप्रतिनिधि थे. मध्य भारत में जनसंघ और भाजपा के विकास समेत मध्य प्रदेश के विकास में उनका बड़ा योगदान है. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और देश के गृह मंत्री अमित शाह ने जोशी को जमीन से जुड़ा नेता बताया. मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री कमल नाथ ने कहा कि कैलाश जोशी सादा जीवन उच्च विचार के राजनेता थे. वे जीवनपर्यंत मूल्य और सिद्धांतों के प्रति समर्पित रहे. कभी समझौता नहीं किया. नाथ ने उनके निधन को प्रदेश के लिए बड़ी क्षति बताया.

मध्य प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन और छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनुसुइया उइके ने भी दुख जताया. केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने ट्वीट करके लिखा कि उनका निधन हमारे लिए बहुत बड़ी क्षति है. छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि वे अविभाजित मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री रहे. बघेल ने कहा कि ये सौभाग्य है कि उनके साथ काम करने का मौका मिला. प्रभात झा, सुरेश पचौरी समेत कई नेताओं ने कैलाश जोशी को श्रद्धांजलि दी. केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि श्री जोशी के निधन से मुझे गहरी वेदना की अनुभूति हुई है. भारतीय जनता पार्टी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि मन अत्यंत दुखी है. उनका निधन संगठन के लिए एक अपूर्णीय क्षति है.

1978 जनवरी मे अस्वस्थता की वजह से त्याग दिया था मुख्यमंत्री का पद
कैलाश जोशी 24 जून, 1977 में मध्य प्रदेश के सीएम बने थे. लेकिन छह महीने बाद 17 जनवरी, 1978 को ही उन्होंने बीमारी की बात कहते हुए सीएम पद से इस्तीफा दे दिया. हालांकि, इसकी दूसरी राजनैतिक वजहें रही थीं. इसके बाद वे प्रदेश में लगातार सक्रिय रहे. 1985 में हुए चुनाव में वे फिर विधायक बने और विपक्ष में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभाई. 1990 में नौवीं विधान सभा में बीजेपी की सरकार आने पर वे वाणिज्य, उद्योग एवं ऊर्जा मंत्री बनाए गए. 1993 में में फिर विधायक बने और इस बार उन्हें बीजेपी किसान मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया. कैलाश जोशी बाद में ऊर्जा मंत्री रहते हुए जोशी  ने पहली बार ऊर्जा के क्षेत्र में निजी निवेश को शुरू किया. 

कैलाश जोशी 2001 में राज्यसभा सांसद चुने गए. इस दौरान उन्हें छत्तीसगढ़ में पार्टी का प्रदेश प्रभारी बनाया गया था. जोशी इसके बाद पार्ट के अनुशासन समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे. 2002 में उन्हें एमपी बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बनाकर भेजा गया और यहां 10 साल की कांग्रेस सरकार के खिलाफ पार्टी का नेतृत्व सौंपा गया. इसके बाद बीजेपी लगातार 15 साल मध्य प्रदेश में सत्ता पर काबिज रही. जोशी 2004 और 2009 में भोपाल से लोकसभा सांसद रहे. आज सत्ता के गलियारों में ये बात गूंज रही है कि 1978 में बीमारी का बहाना बनाते हुए जोशी ने सीएम पद त्याग दिया जबकि, इसके बाद वे कई बड़ी जिम्मेदारी निभाते रहे. बीमारी के बहाने के करीब 39 साल बाद उनका निधन हुआ.