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कमलनाथ सरकार फिर खोलेगी शिवराज सरकार में बंद हुईं व्यापमं की 510 फाइलें

शिवराज सरकार के दौरान बंद की गईं व्यापमं की फाइलों को कमलनाथ सरकार ने फिर से खोलना शुरू कर दिया है. इन फाइलों की तादाद 500 से ज्यादा है. फाइलें में व्यापमं में फर्जीवाड़े को लेकर शिकायतें हैं. पिछले दिनों विधानसभा सत्र के दौरान व्यापमं का मुद्दा उठने के बाद व्यापमं मामले की जांच के लिए गठित पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने इन फाइलों को फिर से खंगालना शुरू कर दिया है.

कमलनाथ सरकार फिर खोलेगी शिवराज सरकार में बंद हुईं व्यापमं की 510 फाइलें
बीते विधानसभा सत्र के दौरान सदन में ये मुद्दा उठा था.

भोपाल: शिवराज सरकार के दौरान बंद की गईं व्यापमं की फाइलों को कमलनाथ सरकार ने फिर से खोलना शुरू कर दिया है. इन फाइलों की तादाद 500 से ज्यादा है. फाइलें में व्यापमं में फर्जीवाड़े को लेकर शिकायतें हैं. पिछले दिनों विधानसभा सत्र के दौरान व्यापमं का मुद्दा उठने के बाद व्यापमं मामले की जांच के लिए गठित पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने इन फाइलों को फिर से खंगालना शुरू कर दिया है.

2013 में व्यापमं मामला खुलने के बाद इसकी जांच के लिए एसटीएफ का गठन कर दिया था. एसटीएफ ने जब इस मामले से जुड़ी शिकायतों को जानने के लिए अखबारों में जाहिर सूचना प्रकाशित की तो 1049 शिकायतें आईं थीं. जब ये जांच सीबीआई को सौंपी गई तब तब एसटीएफ ने सीबीआई को 212 प्रकरण सौंपे इनमें से 530 शिकायतें थानों को भेज दी गईं और 510 शिकायतें जिलों में भेजी गईं. 

510 में से 313 शिकायतों का जिलों में पुलिस अधीक्षक कार्यालय के जरिए निराकरण किया गया और 197 फाइलों पर जिलों में पेंडिंग पड़ी हैं. दरअसल जिन 510 फाइलों का उल्लेख है, वह नस्तीबद्ध कर दी गईं यानी उन्हें बंद कर दिया गया. तर्क ये दिया गया कि इनमें शिकायतें अस्पष्ट हैं या फिर आवेदक का नाम नहीं है या फिर आवेदक पते पर नहीं मिल रहा है. 

कांग्रेस ने इन मामलों को खोलने की तैयारी कर ली है जो शिवराज सिंह सरकार के दौरान बंद की गईं. कांग्रेस को शक है कि इन्हें जानबूझकर बंद किया गया है. फाइलें सीबीआई को भी सौंपी जा सकती थीं. अब कांग्रेस ये पता लगाएगी कि इन्हें निराकरण के लिए जिलों और थानों में क्यों भेजा गया और इसकी वजह क्या है. 

बीते विधानसभा सत्र के दौरान सदन में ये मुद्दा उठा था. कांग्रेस विधायक मुन्नालाल गोयल और प्रताप ग्रेवाल ने आरोप लगाया था कि बीजेपी सरकार के दौरान व्यापमं मामले की जांच ठीक से नहीं की गई थी. उसकी ठीक जांच की जानी चाहिए. इसमें उन 510 प्रकरणों को भी खोलना चाहिए, जो किसी ना किसी बहाने के जरिए बंद कर दिया गया. हालांकि इन 510 में से 197 मामले ऐसे हैं जिनकी जांच को लंबा खींचा जा रहा है. सरकार के रुख को देखते हुए अब एसटीएफ ने इन फाइलों को जिलों से फिर बुलाना शुरू कर दिया है. साथ ही 197 फाइलों से धूल झाड़कर पन्ने पलटने शुरू कर दिए गए हैं. 

शुरुआत में गुमनाम पत्र के आधार पर हो रही थी व्यापमं जांच
व्यापमं मामला 2013 में खुला था. तब कहा जा रहा था कि एक गुमनाम पत्र उस वक्त के सीएम शिवराज सिंह चौहान को मिला था. इसके बाद उन्होंने उस गुमनाम पत्र के आधार पर जांच शुरू की थी. हालांकि ये गुमनाम पत्र एक बार फिर चर्चाओं में आ गया है. क्योंकि जब मौजूदा कांग्रेस सरकार के गृह मंत्री बाला बच्चन से विधानसभा सत्र के दौरान विधायकों ने सवाल पूछा कि वो गुमनाम पत्र कहां है उसमें क्या लिखा है. तो बाला बच्चन ने जवाब दिया कि ऐसा कोई गुमनाम पत्र सरकार और गृह विभाग के पास नहीं है.

बाला बच्चन ने ये उल्लेख भी किया कि यही सवाल बीजेपी सरकार के दौरान तत्कालीन गृह मंत्री बाबूलाल गौर से भी पूछा गया था. उन्होंने भी किसी गुमनाम पत्र से इनकार कर दिया था. लेकिन व्यापक जांच करने के लिए एसटीएफ ने शिकायतों के लिए अखबारों में जाहिर सूचना प्रकाशित की तब 1047 शिकायतें आईं. जांच उन्हीं आधारों पर हो रही है.