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इस 'जेवीपीसी' से नहीं बच पाएंगे आतंकी और नक्‍सली, 1 मिनट में 900 राउंड करती है फायर

कानपुर स्थित स्‍मॉल आर्म्‍स फैक्‍टरी ने बनाई है ज्‍वाइंट वेंचर प्रोटेक्टिव कार्बाइन. बुलेट प्रूफ जैकेट को भी भेद सकने में है सक्षम.

इस 'जेवीपीसी' से नहीं बच पाएंगे आतंकी और नक्‍सली, 1 मिनट में 900 राउंड करती है फायर
कानपुर स्थित स्‍मॉल आर्म्‍स फैक्‍टरी ने बनाई शक्तिशाली ज्‍वाइंट वेंचर प्रोटेक्टिव कार्बाइन यानी जेवीपीसी.

कानपुर : देश को आतंकियों और नक्‍सलियों से महफूज रखने के लिए नई उपलब्धि हासिल कर ली गई है. कानपुर स्थित स्‍मॉल आर्म्‍स फैक्‍टरी (एसएएफ) ने बहुप्रतीक्षित मारक हथियार ज्‍वाइंट वेंचर प्रोटेक्टिव कार्बाइन यानि जेवीपीसी बनाने में सफलता पाई है. शुक्रवार (4 मई) को स्‍मॉल आर्म्‍स फैक्‍टरी ने इसे लांच भी कर दिया है. लांचिंग समारोह के दौरान इन बहुप्रतीक्षित जेवीपीसी की 50 कार्बाइनों की पहली खेप छत्‍तीसगढ़ पुलिस को सौंप भी दी गई है. जेवीपीसी की ताकत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यह एक मिनट में 900 राउंड फायर करती है. साथ ही इसका निशाना भी सटीक है. इसके आ जाने से अब आतंकियों और नक्‍सलियों से निपटने में आसानी होगी. यह 23 परतों वाली बुलेट प्रूफ जैकेेेट को भी भेदने में सक्षम है.

Kanpur: Small arms factory launch JVPC for combat against terrorism and Naxal

फायर करते समय रहती है स्थिर
कानपुर स्थित स्मॉल आर्म्स फैक्टरी में बनी यह कार्बाइन हमारे सशस्त्र बलों और पुलिस की नई ताकत बनकर उभरेगी. मौका चाहे इंडियन आर्मी के बख्तरबंद गाड़ियों में सफर या गश्‍त करते समय हुए आतंकी हमले का हो या किसी कमांडो कार्रवाई में पैराशूट से हवाई छलांग लगाने का, इन मौकों पर अगर हथियार हिल गया तो समझो निशाना चूका और दुश्मन को बच निकलने का मौका मिल गया. लेकिन कानपुर की स्माल आर्म्स फैक्ट्री ने इन आशंकाओं को लगभग खत्म कर दिया है. उसकी बनाई गई इस अत्‍याधुनिक जेवीपीसी ऐसे मौकों के लिए काफी मुफीद है. जेवीपीसी की खूबी ये है कि फायरिंग करते समय ये बिलकुल नहीं हिलती और स्थिर रहती है. 

छत्‍तीसगढ़ पुलिस को सौंपी पहली खेप
कानपुर स्थित स्‍मॉल आर्म्‍स फैक्‍टरी द्वारा बनाई गई जेवीपीसी का ऑपरेशन गैस और सेलेक्टिव फायर से होता है. ये देश की सीमा के अंदर घुसे आतंकवादियों और नक्सली हमलों से निपटने के लिए अर्द्धसैनिक बलों और राज्य पुलिस बलों की जरूरतों को पूरा करेगी. इसकी खूबियों को देखते हुए नक्सल प्रभावित राज्य छत्तीसगढ़ ने 640 कार्बाइनों की मांग की थी और 4 मई को लांचिंग के मौके पर 50 कार्बाइन की पहली खेप छत्तीसगढ़ पुलिस के सुपुर्द कर दी गई.

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विदेशी तकनीक को देगी टक्‍कर
जर्मनी ने 'एचके' और बेल्जियम ने 'एफएन' नाम से ऐसी की कार्बाइनें बनाई हुई हैं और उनकी मांग कई देशों से आती रहती हैं. लेकिन अब भारत के पास पूर्णतया स्वदेशी तकनीक से बनी जेवीपीसी कार्बाइन है. ये जर्मनी की 'एचके' और बेल्जियम की 'एफएन' को टक्कर देगी. अपनी देशी कार्बाइन की मारक क्षमता 200 मीटर है और ये एक मिनट में 900 राउंड फायर कर सकती है. महज तीन किग्रा वजन वाली जेवीपीसी की लंबाई इसके छोटे बट की वजह से अन्य कार्बाइनों से कम है. दुश्मन चाहे दो सौ मीटर की दूरी पर हो, उसने 23 परतों वाली बुलेट प्रूफ जैकेट ही क्‍यों न पहन रखी हो, इस कारबाइन की गोली उसका सीना भेद सकने में सक्षम है.

जल्‍द बन सकती है सेना का हिस्‍सा
एसएएफ की जेवीपीसी की खूबियों को देखते हुए छत्तीसगढ़ पुलिस बेहद उत्साहित है और नक्‍सलियों के खिलाफ एक बड़ा अभियान छेड़ने का दम भर रही है. स्माल आर्म्‍स फैक्टरी ने इसके अलावा बेल्ट फेड लाइट मशीन गन भी विकसित की है, जो जल्दी ही इंडियन आर्मी का हिस्सा बन सकती है. प्रधानमंत्री मोदी ने कानपुर से बुन्देलखण्ड के बीच जो आयुध बेल्ट कारीडोर बनाने का सपना देखा है, कानपुर के आयुध कारखाने उसे अभी से सच करने लगे हैं.