'रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे..' के नारे से जुड़ी हर वो बात जो शायद आप नहीं जानते होंगे

राम भक्तों की जुबान पर रहे इस नारे को मध्य प्रदेश के उज्जैन निवासी बाबा सत्यनारायण मौर्य ने दिया था.

'रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे..' के नारे से जुड़ी हर वो बात जो शायद आप नहीं जानते होंगे
बैनर वाले गुलाबी कपड़े से बना अस्थाई श्रीराम का मंदिर.(पुरानी तस्वीर)

इंदौर: अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की शुरुआत होने के साथ ही लाखों कारसेवकों का सपना पूरा हो गया है. ऐसे में उस नारे को नहीं भूला जा सकता जो 34 साल पहले दिया गया था  `रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे..`. राम भक्तों की जुबान पर रहे इस नारे को मध्य प्रदेश निवासी बाबा सत्यनारायण मौर्य ने  उज्जैन से दिया था.

बजरंग दल के शिविर में दिया था नारा
रामजन्मभूमि आंदोलन में गूंजने वाला सबसे चर्चित नारा रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे सबसे पहले बजरंग दल के एक शिविर में दिया गया था. जो बाद में रामजन्मभूमि आंदोलन का एक अहम नारा बन गया. अंतरर्राष्ट्रीय ख्याती प्राप्त चित्रकार बाबा सत्यनारायण मौर्य बताते हैं कि 1986 में वो मध्य प्रदेश के राजगढ़ से अपनी पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहे थे. तब उज्जैन में बजरंग दल का शिविर लगा था, जिसमें वो शामिल हुए.  शिविर में शाम के वक्त कई तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम होते थे, जहां उन्होंने सबसे पहले राम मंदिर को लेकर ये नारा दिया. 

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1992 में पहली बार मंच संचालन किया
कारसेवक बाबा सत्यनारायण मौर्य ने राम मंदिर आंदोलन के वक्त को याद करते हुए बताया कि उस वक्त उज्जैन से छिपकर वो अयोध्या पहुंचे थे, जहां घरों पर राम मंदिर निर्माण को लेकर नारे और प्रभु श्रीराम के चित्र गेरू से उकेरे थे. उन्होंने बताया कि कई बार पुलिस-प्रशासन के डर से भागना भी पड़ा, लेकिन कभी हिम्मत नहीं हारी. बाबा सत्यनारायण मौर्य ने अयोध्या में 6 दिसंबर 1992 में कारसेवा के दौरान पहली बार मंच संचालन भी किया था. वो अपने पिता और छोटे भाई के साथ अयोध्या पहुंचे थे.

सत्यनारायण मौर्य बताते हैं कि 1992 में जब अयोध्या में विवादित ढांचा गिराया गया, उससे पहले से वो वहां पेंटिंग के लिए मौजूद थे. उस समय 4 फीट चौड़ा कपड़ा बहुत कम मिल पाता था लेकिन पूरे अयोध्या में राम मंदिर पर आधारित कई बैनर लगाए. 6 दिसंबर को जब बाबरी मस्जिद का ढांचा गिरा और सरकार ने निर्माण पर रोक लगाई, तो उसी मलबे में रामजी को बिठा दिया. हालांकि बाद में पत्थर बराबर किए गए और लकड़ी लगाकर बैनर वाले गुलाबी कपड़े से ही अस्थाई मंदिर बनाया.

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