MP:कमलनाथ सरकार की 'नई शराब नीति' पर BJP ने उठाया महिलाओं का सवाल

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने आबकारी नीति पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए महिला सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं.

MP:कमलनाथ सरकार की 'नई शराब नीति' पर BJP ने उठाया महिलाओं का सवाल
'नई शराब नीति' पर BJP ने उठाया महिलाओं का सवाल

भोपाल: कमलनाथ सरकार के आबकारी नीति बदलने के विचार को लेकर बीजेपी हमलावर हो गई है. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने आबकारी नीति पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए महिला सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं.

BJP ने उठाया महिलाओं का सवाल
नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा कि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो का दावा है कि 75 प्रतिशत अपराध नशे में होते हैं. नशे में धुत लोगों का शिकार अधिकतर महिलाएं होती हैं. नेता प्रतिपक्ष भार्गव ने प्रदेश सरकार से पूछा कि सरकार बताएं कि उनके लिए शराब माफ़िया संरक्षण जरूरी है या प्रदेश की जनता?.

मादक मुक्त की जगह "मादक युक्त" बना प्रदेश
नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा कि कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में स्पष्ट लिखा था कि "मादक मुक्त मध्यप्रदेश" बनाएंगे. इसके विपरीत "मादक युक्त प्रदेश" बना दिया है. बीजेपी नेता ने छोटे कारोबारियों के हितों को लेकर भी सरकार पर आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि 16 साल बाद पुरानी नीति से जिलों में छोटी पूंजी वाले ठेकेदार बाहर हो जाएंगे. इस कदम से कमलनाथ सरकार का अब असली माफिया युग शुरू होगा.

आबकारी नीति पर कांग्रेस का जवाब
आबकारी नीति को लेकर जहां बीजेपी कांग्रेस सरकार पर आरोप लगा रही है. वहीं कांग्रेस ने विपक्ष को जवाब दिया है. मध्यप्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष भूपेंद्र गुप्ता का कहना है कि यह नीति पहले भी थी लेकिन बीच में शिवराज सरकार ने इसको बदल दिया. इस नीति से शराब की अवैध बिक्री कम होगी और कोई शराब माफियाओं को बढ़ावा नहीं मिलेगा.  

कमलनाथ सरकार अपनाएगी 16 साल पुरानी नीति-सूत्र
सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि, कमलनाथ सरकार आबकारी नीति में बड़ा बदलाव करते हुए 16 साल पुरानी नीति अपनाने जा रही है. जिसके तहत शराब की दुकानें अलग-अलग नीलाम करने के बजाए ठेकेदारों के समूहों को एक या दो जिलों की सभी दुकानें देने की तैयारी कर रही है. इसी के साथ एक साल का लाइसेंस देने और अगले साल टेंडर करने की व्यवस्था को भी बदलकर दो साल का लाइसेंस दिया जा सकता है. गौरतलब है कि 16 साल पहले दिग्विजय सिंह के मुख्यमंत्री रहते शराब का कारोबार समूहों के ही हाथ में था. इसके बाद बीजेपी के सत्ता में आने पर यह नीति बदल दी गई थी.