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दस्तक अभियान के तहत ग्वालियर में मिले 76 कुपोषित बच्चे, 51 को NRC में कराया गया भर्ती

एनआरसी के तहत 76 बच्चे कुपोषण का शिकार होना पाए गए हैं. इन सभी 76 बच्चों में से 51 बच्चों को एनआरसी में अब तक भर्ती कराया गया है. वहीं 18 बच्चे अभी भी अपने भर्ती होने की बारी का इंतजार कर रहे हैं.

दस्तक अभियान के तहत ग्वालियर में मिले 76 कुपोषित बच्चे, 51 को NRC में कराया गया भर्ती
मध्यप्रदेश सरकार द्वारा 10 जून से लेकर 20 जुलाई तक दस्तक अभियान चलाया जा रहा है. (फाइल फोटो)

ग्वालियरः मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में कुपोषण किस कदर बेकाबू हुआ है इसकी बानगी दस्तक अभियान के तहत जांच के दौरान सामने आए आंकड़े दे रहे हैं. 10 जून से शुरू हुए दस्तक अभियान के तहत अब तक 91 हजार 785 बच्चों की स्क्रीनिंग कराई गई है, जिसमें से अकेले ग्वालियर शहरी एनआरसी के तहत 76 बच्चे कुपोषण का शिकार होना पाए गए हैं. इन सभी 76 बच्चों में से 51 बच्चों को एनआरसी में अब तक भर्ती कराया गया है. वहीं 18 बच्चे अभी भी अपने भर्ती होने की बारी का इंतजार कर रहे हैं.

यह हालात तो ग्वालियर के शहरी एनआरसी के हैं. कुछ ऐसे ही हालात ग्वालियर की तीन अन्य एनआरसी सेंटर मोहना भितरवार और घाटीगांव के भी हैं. सूबे की महिला एवं बाल विकास मंत्री इमरती देवी के गृह जिले के हालात अगर यह हैं तो बाकी के जिलों में क्या हाल होंगे इस बात को आप बखूबी समझ सकते हैं. एनआरसी प्रभारी डॉ मोनिका यादव का कहना है कि अधिकांश बच्चे जो कुपोषित आ रहे हैं उनका सबसे बड़ा कारण है माता का कमजोर होना. जहां माता कमजोर है उससे बच्चे भी कमजोर पैदा होते हैं. 

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इसके साथ ही जो पोषण आहार उन्हें आंगनवाड़ियों के माध्यम से दिया जाता है. उसका वह उपयोग नहीं करती हैं इसके साथ ही बच्चों को स्तनपान भी नहीं कराया जा रहा है जिसके चलते कुपोषण के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. गौरतलब है कि छोटे बच्चों में होने वाली बीमारियों का पता करने के लिए मध्यप्रदेश सरकार द्वारा 10 जून से लेकर 20 जुलाई तक दस्तक अभियान चलाया जा रहा है जिसके तहत ग्वालियर जिले के 178261 बच्चों की स्क्रीनिंग की जानी है.