RSS से संबंध रखने वाले सरकारी कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी से रखा जाए बाहर, विपक्षी दलों की मांग

भोपाल में मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त ओपी रावत ने सभी दलों के प्रतिनिधियों से की मुलाकात, सभी दलों ने दर्ज कराई अपनी-अपनी शिकायतें. 

RSS से संबंध रखने वाले सरकारी कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी से रखा जाए बाहर, विपक्षी दलों की मांग
सभी विपक्षी दलों ने बैलेट पेपर से मतदान कराने की मांग मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त से की है. (फोटो: PTI)

नई दिल्‍ली: मध्‍य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 के दौरान राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ से रिश्‍ते रखने वाले सरकारी कर्मचारियों को मतदान और मतगणना की ड्यूटी से बाहर रखा जाए. यह मांग मध्‍य प्रदेश के सभी विपक्षी पार्टियों ने चुनाव आयोग की है. दरअसल, मध्‍यप्रदेश चुनाव 2018 के मद्देनजर मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त ओपी रावत मंगलवार को भोपाल में थे. जहां उन्‍होंने बीजेपी, कांग्रेस, बसपा, आम आदमी पार्टी और सीपीआई-एम के प्रतिनिधियों से मुलाकात की. इस मुलाकात के दौरान राजनैतिक दलों ने निष्‍पक्ष चुनाव के लिए मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त ओपी रावत के सामने कई बिंदु रखे. बैठक के दौरान सीपीआई-एम की तरफ से RSS से जुड़े सरकारी कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी से बाहर रखे जाने की बात कही गई थी. 

बैठक के दौरान, सीपीआई-एम के राज्‍य सचिव जसविंदर सिंह ने आशंका जाहिर की कि राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ की शाखाओं में जाने वाले सरकारी कर्मचारी भाजपा के पक्ष में चुनाव प्रभावित कर सकते हैं. लिहाजा, इन कर्मचारियों को चुनाव की ड्यूटी से दूर रखा जाए. वहीं, आम आदमी पार्टी के तरह से पहुंचे प्रतिनिधियों ने सीपीआई-एम के राज्‍य सचिव जसविंदर सिंह की इस मांग का न केवल समर्थन किया, बल्कि भाजपा से जुड़े या भाजपा के प्रति सहानुभूति रखने वाले सरकारी कर्मचारियों को चुनाव प्रक्रिया से पूरी तरह से बाहर करने की मांग रख दी. आम आदमी पार्टी की तरफ से यह भी मांग की गई कि चुनाव प्रचार थमते ही मीडिया में आने वाले सभी विज्ञापनों पर चुनाव आयोग की तरफ से रोक लगानी चाहिए. जिससे आखिरी समय पर मतदान प्रक्रिया को प्रभावित न किया जा सके. 

बैलट पेपर से चुनाव कराने की मांग 
बैठक के दौरान, आम आदमी पार्टी की तरफ से मध्‍य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 को ईवीएम से करने की बजाय बैलट पेपर से कराने की मांग भी की गई. आम आदमी पार्टी की इस मांग का कांग्रेस और बसपा ने भी समर्थन किया. कांग्रेस की तरफ से आए प्रतिनिधि ने मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त से कहा कि चुनावों की विश्‍वसनीयता बनाए रखने के लिए बेहतर होगा कि विधानसभा चुनाव को ईवीएम की जगह बैलट पेपर से कराया जाए. हालांकि, कांग्रेस के समक्ष एक दूसरा विकल्‍प भी रखा. जिसमें कहा गया कि यदि बैलट पेपर से चुनाव संभव नहीं है तो ईवीएम के साथ वीवीपैट पर्चियों को अनिवार्य किया जाए. साथ ही, जिन विधानसभा क्षेत्रों में जीत और हार का अंतर 1000 से कम है तो वीवीपैट पर्जी से दोबारा मिलान के बाद ही चुनाव परिणाम जारी किया जाए. 

फर्जी मतदाताओं का भी उठा मुद्दा
मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त ओपी रावत से मुलाकात के दौरान कांग्रेस की तरफ से मतदाता सूची में गड़बड़ी का मुद्दा भी उठाया गया. कांग्रेस की तरफ से कहा गया कि उनकी पार्टी की तरह से 60 लाख फर्जी वोटर की शिकायत की गई थी. उनकी शिकायत पर मतदाता सूची से करीब 24 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं. लेकिन, 53 विधानसभाओं की मतदाता सूची में अभी भी फर्जी मतदाताओं की मौजूदगी है. ऐसे फर्जी मतदाताओं की संख्‍या करीब 17.15 लाख हैं. उन्‍होंने मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त को बताया कि प्रदेश सरकार के कुछ मंत्रियों के विधानसभा क्षेत्र में हजारों की संख्‍या में फर्जी वोटर मौजूद हैं, जिनके खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है. उन्‍होंने मांग की कि चुनाव आयोग इस बाबत तत्‍काल संज्ञान लेते हुए फर्जी नामों को हटवाने की व्‍यवस्‍था करें. 

योजनाओं की घोषणा पर भी आपत्ति
बैठक के दौरान, कांग्रेस ने आपत्ति जाहिर की कि मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी जन आर्शीवाद यात्रा में ऐसी घोषणाओं का ऐलान कर रहे हैं, जिनका चुनाव से पहले पूरा होना संभव नहीं है. बीजेपी की तरफ से होने वाली ऐसी घोषणाओं पर रोक लगनी चाहिए. कांग्रेस की तरफ से यह शिकायत भी की गई कि जन आर्शीवाद यात्रा में सरकारी धन को पानी की तरह बहाया जा रहा है. आवास स्‍कीम के तहत बीजेपी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की फोटो वाली टायल्‍स लगाई जा रही हैं. राज्‍य सरकार द्वारा उपलब्‍ध कराए जा रहे श्रमिक कार्ड में भाजपा की झलक मौजूद है. निष्‍पक्ष चुनाव के लिए इन सब चीजों पर रोक लगना चाहिए. वहीं बैठक के दौरान, बसपा ने मांग की कि चुनाव प्रचार के दौरान मतदाताओं को अपने पक्ष में लाने के लिए रुपयों और शराब को बड़े पैमाने पर बांटा जाता है. इसके अलावा, उपहार स्‍वरूप कंबल और साडियां जैसी दूसरी चीजें बांटी जाती है. जिन पर तत्‍काल प्रभाव से रोक लगनी चाहिए.