साल में एक दिन खुलने वाले नागचंद्रेश्वर मंदिर में पड़ी दरार, श्रद्धालु करेंगे एलइडी से दर्शन

आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) द्वारा जारी एक रिपोर्ट में मंदिर के स्ट्रक्चर को लेकर सवाल उठाए गए हैं.

साल में एक दिन खुलने वाले नागचंद्रेश्वर मंदिर में पड़ी दरार, श्रद्धालु करेंगे एलइडी से दर्शन
नागचंद्रेश्वर मंदिर में भगवान विष्णु की तरह ही शिव-पार्वती सर्प शय्या पर विराजमान हैं.(फोटो साभार- गूगल)

नई दिल्ली/उज्जैन: ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर के तीसरे तल पर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर साल में एक बार ही खुलता है. नागपंचमी (श्रावण शुक्ल पंचमी) के दिन मंदिर के पट खोले जाते हैं और इस दिन दर्शन करने के लिए लाखों की तादाद में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं. हाल ही में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) द्वारा जारी एक रिपोर्ट में मंदिर के स्ट्रक्चर को लेकर सवाल उठाए गए हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि श्रद्धालुओं को दर्शन कराने के लिए तीसरे तल पर हर साल रेलिंग लगाई जाती है. इसके कारण मंदिर का ऊपरी हिस्सा जर्जर हो गया है. कई जगह पर मरम्मत की जरूरत है. रिपोर्ट सामने आने के बाद उज्जैन के कलेक्टर और महाकाल मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष मनीष सिंह ने नागचंद्रेश्वर मंदिर के परिसर का निराक्षण किया है. बताया जा रहा है कि इस साल नागचंद्रेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं को एलइडी से दर्शन कराने कराने की व्यवस्था की जा रही है. 

श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या से मंदिर को हो सकता है नुकसान 
एएसआई की रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर के पत्थर कमजोर हो गए हैं. इसके कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से मंदिर परिसर को नुकसान पहुंच सकता है. इस मामले पर कलेक्टर मनीष सिंह ने कहा कि इस बार नागपंचमी पर एलइडी के माध्यम से दर्शन करवाए जाएंगे या फिर श्रद्धालुओं की संख्या को सीमित किया जाएगा. उन्होंने बताया कि मंदिर की जर्जर हो रही इमारत की मरम्मत करवाई जाएगी. उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर के लिए जो बेहतर होगा, वही कदम उठाए जाएंगे. गौरतलब है कि महाकाल मंदिर नागर शैली में बना हुआ है. 

यहां शिव-पार्वती हैं सर्प शय्या पर विराजमान
उज्जैन स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर के बारे में मान्यता है कि नागराज तक्षक स्वयं मंदिर में रहते हैं. नागचंद्रेश्वर मंदिर में 11वीं शताब्दी की प्रतिमा लगी है. प्रतिमा में में फन फैलाए नाग के आसन पर शिव-पार्वती बैठे हैं. बताया जाता है कि यह प्रतिमा नेपाल से यहां लाई गई थी. पूरी दुनिया में यह एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां भगवान विष्णु की तरह ही शिव-पार्वती सर्प शय्या पर विराजमान हैं. कहा जाता है कि सर्पराज तक्षक ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए घोर तपस्या की थी. तपस्या से प्रसन्न हुए भगवान शिव ने सर्पों के राजा तक्षक को अमरत्व का वरदान दिया था. मान्यता है कि उसके बाद से ही नागराज तक्षक ने महाकाल के सानिध्य में वास करना शुरू कर दिया. वहीं भगवान शिव की तपस्या में विघ्न ना हो, इस कारण से केवल नागपंचमी के दिन ही मंदिर के पट खुलते हैं.