कर्जमाफी की आस में बैठे किसान के घर पहुंच गया बैंक का वसूली नोटिस, परेशान होकर दे दी जान

मध्यप्रदेश में भले है सरकार किसानों की कर्ज माफी की बात कह रही है, बाबजूद इसके एक के बाद एक किसान आत्महत्या कर रहे हैं. रीवा में कर्जमाफी की आस में एक गरीब किसान की सांसे टूट गई.

कर्जमाफी की आस में बैठे किसान के घर पहुंच गया बैंक का वसूली नोटिस, परेशान होकर दे दी जान
(सांकेतिक तस्वीर)

रीवाः मध्यप्रदेश में भले है सरकार किसानों की कर्ज माफी की बात कह रही है, बाबजूद इसके एक के बाद एक किसान आत्महत्या कर रहे हैं. रीवा में कर्जमाफी की आस में एक गरीब किसान की सांसे टूट गई. यह अकेले किसान की बात नहीं है, बैंक ने इस गांव में कई किसानों को कर्ज जमा करने का नोटिस दिया गया है. जिसके बाद से किसान परेशान और हैरान हैं. दरअसल, रीवा जिले के पटना गांव के कई किसान कर्ज के बोझ में दबे हुए हैं, बैंक के कर्जदार किसानों की लिस्ट में बंसपति साहू भी एक था. 

बंसपति सालभर से कर्ज माफी की आस में बैठा था, लेकिन जब बैंक ने वसूली का नोटिस भेजा और कर्ज की राशि जमा नहीं करने पर कुर्की की धमकी दी तो किसान का धैर्य टूट गया और उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. इस किसान ने मध्यांचल बैंक से डेढ़ लाख रूपये का कर्ज लिया था. जो बढ़कर 2 लाख 25 हजार हो गया था. किसान का नाम कर्ज माफी की सूची में था, लेकिन बैंक ने 10 दिन के अंदर कर्ज की अदायगी का नोटिस दिया था. बंसपति के अलावा शेषमणि, वृन्दावन, जयकरण, चैतू, नरेंद्र, अवध जैसे गांव के कई किसानों को कर्ज चुकाने का नोटिस दिया है. इसके बाद से गांव में हड़कंप मच गया है.

देखें LIVE TV

किसानों को समझ नहीं आ रहा है कि कर्ज माफी के बाद भी कर्ज चुकाने का नोटिस बैंक कैसे दे रहा है. इससे गांव के किसान काफी परेशान और हैरान हैं. वहीं हैरानी की बात यह है कि जिन किसानों ने बैंक में कुछ राशि जमा की थी, उन्हें भी बैंक ने नोटिस पकड़ा दिया है. बैंक किसानों की कर्ज वाली राशि में जीएसटी, फसल बीमा सहित अन्य टैक्स लगा रहा है. जिससे यह राशि भारी भरकम हो रही है. 

मध्य प्रदेश में अंडों पर शुरू हुई सियासत, BJP नेता बोले- 'सनातन धर्म में निषेध है मांसाहार'

इतना ही नहीं जिन किसानो ने बैंक से पूर्व में लोन लिया था उन्हें कर्ज देने से मना किया जा चुका है. स्थानीय विधायक ने सड़क से सदन तक लड़ाई लड़ने की चेतावनी दी है. पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह इन किसानों से मिलकर आगे की रणनीति बनाएंगे और कांग्रेस सरकार का विरोध करेंगे. किसान की मौत के बाद हरकत में आये जिला प्रशासन ने 2 लाख तक के कर्जदार किसानों को नोटिस देने से मना किया है. वहीं इस पूरे मामले में जांच कराने की बात कह रहे हैं.