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मध्यप्रदेशः कमजोरियों को हराकर मांउट एवरेस्ट की चोटी के करीब पहुंची किसान की बेटी

सपने तो सभी देखते हैं लेकिन उन्हें पूरा करने का जज्बा कुछ ही लोग रखते हैं. इन्हीं में से एक हैं मेघा परमार.

मध्यप्रदेशः कमजोरियों को हराकर मांउट एवरेस्ट की चोटी के करीब पहुंची किसान की बेटी
(मेघा परमार)

नई दिल्लीः सपने तो सभी देखते हैं लेकिन उन्हें पूरा करने का जज्बा कुछ ही लोग रखते हैं. इन्हीं में से एक हैं सीहोर की मेघा परमार. मध्यप्रदेश के सीहोर के एक छोटे से गांव में जन्मी मेघा एक साधारण परिवार से आती हैं. लेकिन मेघा के सपने साधारण नहीं थे. मेघा कुछ कर दिखाना चाहती थी. मेघा का सपना था कि वह अपने देश का तिरंगा माउंट एवरेस्ट की चोटी पर लहराएं. सीहोर की मिट्टी को एवरेस्ट तक ले जाने का सपना देखने वाली मेघा ने अपने ख्वाबों को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी और न ही उनके माता-पिता ने. हालांकि, मेघा के माता-पिता के लिए मेघा के सपने को पूरा करना आसान नहीं था क्योंकि मेघा के सपने उनकी उनकी हैसियत से काफी बड़े थे. लेकिन, मेघा के परिवार ने भी उनके सपनों को पूरा करने के लिए हर प्रयास किया. अपनी बेटी की मेहनत और जज्बे पर मेघा के पिता को बेहद गर्व है. मेघा के पिता कहते हैं कि उनकी बेटी जल्द ही माउंट एवरेस्ट पर कामयाबी का परचम लहराएगी और देश का नाम रौशन करेगी.

रत्नेश पांडे ने मेघा को एवरेस्ट छूने के लिए तैयार किया
मेघा के पिता दोमोदर परमार कहते हैं कि 'मेघा ने मुझसे एवरेस्ट छूने की अनुमति दो साल पहले मांगी थी, लेकिन उसके शारीरिक रूप से कमजोर होने के कारण मैंने यह बात टाल दी. लेकिन, एवरेस्ट छूने की उसकी चाहत दिनो दिन बढ़ती गई जिसके चलते मुझे उसकी बात माननी पड़ी. एवरेस्ट पर जाने के लिए 23 लाख रुपयों की जरूरत थी, जिसके लिए मेघा सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटती रही, लेकिन उसे कहीं से मदद नहीं मिली. ऐसे में प्राइवेट बैंकों ने आगे आकर मेघा की मदद की. इसी दौरान मेघा की मुलाकात रत्नेश पांडे से हुई. रत्नेश पांडे ने मेघा को एवरेस्ट छूने के लिए मानसिक और शारीरिक तौर पर मजबूत बनने में मदद की.'

वजन कम करने सीहोर से भोपाल तक चलाई साइकिल
मेघा की मां मंजू देवी के अनुसार मेघा का वजन शुरुआती दिनों में काफी ज्यादा था. जिसके चलते मेघा के इंस्ट्रक्टर ने मेघा को वजन कम करने की सलाह दी थी. तो मेघा ने अपना वजन कम करने के लिए साइकिल चलाना शुरू कर दिया. मेघा ने वजन कम करने के लिए रोजाना सीहोर से भोपाल तक साईकल चलाना शुरू किया और बिना रुके अपने मिशन को पूरा करने के लिए मेहनत की. बता दें कि मेघा के माता-पिता मेघा के सपनों को लेकर इतने गंभीर थे कि उन्होंने अपने परिवार के लोगों से अपनी लोकेशन तक छुपा कर रखी थी. 

नेपाल में भूकंप आने के बाद मेघा ने किया रत्नेश पांडे से संपर्क
बता दें कि मेघा ने रत्नेश पांडे से 2015 में सपंर्क किया था. 2016 में एवरेस्ट के शिखर को छूने वाले रत्नेश के अनुसार 2015 में नेपाल में भूकंप आने के कारण उन्हें एवरेस्ट से चोटी को छुए बिना ही लौटना पड़ा था. मेघा ने अखबारों में मेरे वापस आने की खबर पढ़ी और उसके बाद उसने मुझसे संपर्क किया. जिसके बाद उसने मुझसे माउंट एवरेस्ट के शिखर को छूने की ख्वाहिश जाहिर की. इसके बाद मेघा की ट्रेनिंग शुरू की गई. अब वह जल्द ही माउंट एवरेस्ट की चोटी को छुएगी.