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मध्य प्रदेशः इंदौर में दुष्कर्म पीड़िता को हाई कोर्ट ने दी गर्भपात की अनुमति

युवती के भविष्य को देखते हुए हाई-कोर्ट से युवती के गर्भपात के लिए इजाजत मांगी थी, जिसके बाद ग्रीष्मकालीन खंडपीठ ने सोमवार को सुनवाई कर गर्भपात की अनुपात दे दी. युवती के परिजनों ने जस्टिस वीरेंद्र सिंह की खंडपीठ के समक्ष अर्जी दायर की गई थी. 

मध्य प्रदेशः इंदौर में दुष्कर्म पीड़िता को हाई कोर्ट ने दी गर्भपात की अनुमति
(प्रतीकात्मक तस्वीर)

नई दिल्लीः मध्य प्रदेश के इंदौर में अपहरण के बाद सामूहिक ज्यादती की शिकार हुई युवती को गर्भपात कराने की अनुमति हाई कोर्ट ने दे दी है. दरअसल, युवती के साथ हुई ज्यादती के बाद जब परिजनों को युवती के गर्भवती होने पता लगा तो उन्होंने युवती के भविष्य को देखते हुए हाई-कोर्ट से युवती के गर्भपात के लिए इजाजत मांगी थी, जिसके बाद ग्रीष्मकालीन खंडपीठ ने सोमवार को सुनवाई कर गर्भपात की अनुपात दे दी. युवती के परिजनों ने जस्टिस वीरेंद्र सिंह की खंडपीठ के समक्ष अर्जी दायर की गई थी. 

युवती की ओर से अधिवक्ता धमेंद्र चेलावत ने कोर्ट को बताया कि युवती के सामने उसका पूरा भविष्य है. पढ़ाई, नौकरी से लेकर शादी तक बाकी है. ऐसे में ज्यादती के बाद वह शिशु को जन्म देगी, उसे कोई स्वीकार नहीं करेगा. हाई कोर्ट ने याचिका दायर होने के बाद मेडिकल बोर्ड गठित किया था. बोर्ड ने हाई कोर्ट को रिपोर्ट दी कि युवती को नौ सप्ताह का गर्भ हो चुका है. इस स्थिति में गर्भपात किया जाए तो युवती की जान को कोई खतरा नहीं होगा.

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इस रिपोर्ट को देखने के बाद हाई कोर्ट ने आदेश देते हुए यह भी कहा कि गर्भपात के बाद भ्रूण का डीएनए संभालकर रखा जाए. दरअसल, ज्यादती और अपहरण के प्रकरण की सुनवाई ट्रायल कोर्ट में चल रही है. जिसके चलते इस केस में साक्ष्य के तौर पर डीएनए रिपोर्ट काम आ सकती है और इसी को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने भ्रूण का डीएनए संभालकर रखने के निर्देश दिए हैं. ताकि भविष्य में अगर किसी भी तरह से किसी साक्ष्य की जरूरत हो तो डीएनए का इस्तेमाल किया जा सके.

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बता दें इससे पहले अपने ही 16 वर्षीय भाई से दुष्कर्म का शिकार हुई इंदौर के ही भंवरकुआं थाना क्षेत्र निवासी एक अन्य पीड़िता को हाईकोर्ट ने गर्भपात की अनुमति देने से इंकार कर दिया था. क्योंकि इस केस में नाबालिग को 28 हफ्ते का गर्भ था और गर्भपात में उसकी जान को खतरा था, जिसके चलते कोर्ट ने नाबालिग को मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर गर्भपात की अनुमति नहीं दी.