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भोपाल रेप-मर्डर केसः कोर्ट ने दोषी को सुनाई मौत की सजा, लेकिन बिना जल्लाद कैसे होगी फांसी

मध्य प्रदेश की अलग-अलग जेलों में कुल 28 ऐसे कैदी बंद हैं, जिन्हें फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है. इनमें 11 कैदी इंदौर में, 9 कैदी जबलपुर, 4 कैदी भोपाल , 3 कैदी ग्वालियर और 1 कैदी उज्जैन केंद्रीय जेल में सजा काट रहा है.

भोपाल रेप-मर्डर केसः कोर्ट ने दोषी को सुनाई मौत की सजा, लेकिन बिना जल्लाद कैसे होगी फांसी
प्रदेश में जल्लाद नहीं हुआ तो अन्य प्रदेशों से जल्लाद बुलवाकर फांसी दी जा सकती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

भोपालः राजधानी भोपाल के कमलानगर इलाके में 8 जून को घर से सामान लेने निकली मासूम से रेप और हत्या के मामले में आरोपी विष्णु को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है. भोपाल की जिला अदालत की विशेष सत्र न्यायाधीश कुमुद पटेल ने इस पूरे मामले पर सुनावाई करते हुए आरोपी विष्णु को दोषी ठहराते हुए अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के आरोप में फांसी की सजा सुनाई है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर जब प्रदेश की किसी भी जेल में जल्लाद नहीं है तो आरोपी को फांसी की सजा कौन देगा.

बता दें मध्य प्रदेश की जेलों में करीब 28 ऐसे कैदी बंद हैं, जिन्हें निचली अदालत फांसी की सजा दे चुकी है. इनमें से अधिकतर अपराधी रेप के आरोपी हैं. ऐसे में अब जब निचली अदालतों ने इन अपराधियों को फांसी की सजा सुना दी है, तो सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन्हें फांसी देगा कौन, क्योंकि मध्य प्रदेश में एक भी जल्लाद नहीं है. बता दें मध्य प्रदेश में 12 वर्ष से कम उम्र की बच्ची के साथ रेप करने वाले आरोपियों को फांसी की सजा का प्रावधान है. जिसके तहत रेप के कुछ मामलों में निचली अदालतें फांसी की सजा का ऐलान भी कर चुकी हैं, जिसके बाद इन फैसलों के खिलाफ आरोपी हाईकोर्ट चले गए.

वहीं इससे पहले जब मध्य प्रदेश में जल्लाद न होने की बात ने तूल पकड़ा था तो पूर्व जेल मंत्री अंतर सिंह आर्य ने कहा था कि 'मध्यप्रदेश में जल्लाद नहीं है, दुष्कर्म के दोषियों को फांसी पर लटकाने के लिए जल्द की जल्लाद की नियुक्ति की जाएगी.' लेकिन अब जब शिवराज सरकार जा चुकी है और प्रदेश में नई सरकार बन चुकी है तो सवाल यह उठता है कि वर्तमान सरकार का जल्लादों की नियुक्ति पर कब ध्यान दिया जाएगा. 

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बता दें प्रदेश की अलग-अलग जेलों में कुल 28 ऐसे कैदी बंद हैं, जिन्हें फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है. इनमें 11 कैदी केंद्रीय जेल इंदौर में, 9 कैदी जबलपुर केंद्रीय जेल में, 4 कैदी भोपाल केंद्रीय जेल में, 3 कैदी ग्वालियर केंद्रीय जेल में और 1 कैदी उज्जैन केंद्रीय जेल में सजा काट रहा है.

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वहीं जल्लाद की नियुक्ती को लेकर बीजेपी ने प्रदेश की वर्तमान कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि, सरकार केवल तबादलों में उलझी है. सरकारी कामकाज ठप पड़े हुए हैं. बीजेपी विधायक मोहन यादव ने आरोप लगाया की फांसी घर और जल्लादों की भर्ती समय सड़क पेयजल समेत कई काम ठप पड़े हैं. वहीं कांग्रेस का कहना है कि मृत्युदंड के मामले उच्च न्यायालयों में लंबित हैं. डेथ वारंट की स्थिति कहीं भी नहीं है. नियमों में प्रावधान है कि यदि प्रदेश में जल्लाद नहीं हुआ तो अन्य प्रदेशों से जल्लाद बुलवाकर फांसी दी जा सकती है.