MP: ओबीसी आरक्षण पर सरकार के जवाब से हाईकोर्ट असंतुष्ट, 4 हफ्ते बाद फिर होगी सुनवाई

ओबीसी आरक्षण की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार की तरफ से आरक्षण को लेकर पेश किए जवाब न्याय संगत नहीं हैं. इसलिए ओबीसी आरक्षण पर अग्रिम आदेश तक रोक जारी रहेगी. इस दौरान कोर्ट ने इंद्रा साहनी मामले में SC के आदेश का भी उदाहरण दिया.

MP: ओबीसी आरक्षण पर सरकार के जवाब से हाईकोर्ट असंतुष्ट, 4 हफ्ते बाद फिर होगी सुनवाई

जबलपुर: मध्य प्रदेश में ओबीसी के 27 प्रतिशत आरक्षण पर रोक बरकरार रहेगी. यह फैसला हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच ने मामले में सुनवाई करते हुए दिया है. कोर्ट के इस आदेश के बाद राज्य में ओबीसी वर्ग को अब सरकारी नौकरियों में आरक्षण नहीं मिलेगा. अब मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी.

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ओबीसी आरक्षण की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार की तरफ से आरक्षण को लेकर पेश किए गए जवाब न्याय संगत नहीं हैं. आपको बता दें कि बीते 20 जुलाई को कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई की थी. जिसके बाद कोर्ट ने राज्य सरकार को आज यानी कि 18 अगस्त को जवाब देने के लिए कहा था.

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जानें सरकार ने क्या जवाब दिया था?
राज्य सरकार ने अपने जवाब में कहा कि मध्य प्रदेश में 50 फीसदी से ज्यादा ओबीसी की आबादी है. साथ ही ओबीसी की बड़ी आबादी राज्य में सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ेपन का शिकार है. इसलिए आरक्षण देना जरूरी है. 

याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में क्या कहा? 
सरकार के जवाब में याचिकार्ताओं ने अपत्ति जताई है. याचिकार्ताओं ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के मुताबिक 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण नहीं दिया जा सकता है और न ही ऐसा करके अनारक्षित वर्ग के खिलाफ अन्याय किया जा सकता है. 

कांग्रेस ने लगाया टालने का आरोप
पिछड़ा वर्ग कल्याण परिषद की उपाध्यक्ष और कांग्रेस प्रवक्ता विभा पटेल ने कहा कि OBC आरक्षण के मामले में चार सप्ताह का समय महाधिवक्ता के द्वारा न्यायालय से मांगा गया है. इससे स्पष्ट हो गया है कि सरकार OBC आरक्षण के मामले में गंभीर नहीं है. मामले को टालना चाहती है. इसलिए कोर्ट से चार सप्ताह का समय मांगा है.

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